A Truly Beautiful Mind Summary in Hindi | Very Important

By | February 23, 2023

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A Truly Beautiful Mind Summary in Hindi

                                           By-ALBERT EINSTEIN

एल्बर्ट आइंसटाईन का जन्म 14 मार्च , 1879 को जर्मनी के उल्म नामक शहर में हुआ था । वह एक सामान्य-सा दिखाई पड़ने वाला बालक था । उसकी माता तो उसे एक विचित्र बालक मानती थी । उसने बहुत देरी से बोलना शुरू किया । ओर जब वह बोलता था तो प्रत्येक शब्द को दो बार बोलता था । दुसरे बच्चे उसका मजाक उड़ाते थे । इसलिए वह अकेला ही खेलता रहता था । वह मैकेनिकल (यांत्रिक) खिलौनों के साथ  खेलना पसंद करता था । जब वह मात्र 15 बर्ष का था तो उसने वायलिन बजाना सीख था ।
एलबर्ट आइंसटाईन को म्यूनिख में उच्च-विद्यालय में भेजा गया । वह एक अच्छा विद्यार्थी था । वह सभी विषयों में अच्छे अंक प्राप्त करता था । लेकिन उसे स्कूल का कठोर अनुशासन पसंद नहीं था । वह प्राय: अपने  अध्यापकों के साथ झगड़ पड़ता था । इसलिए  उसने हमेशा के लिए ही स्कूल को छोड़ दिया ।

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लंबे वार्तालाप के पश्चात वह स्विटूजरलैंड में अपनी पढाई को जारी रखने के लिए सहमत हो गया । गणित में तो वह बहुत विशिष्टता प्राप्त था तथा भौतिकी में भी उसकी बहुत रुचि थी । हाई स्कूल की परीक्षा पास करने के पश्चात उसने ज्यूरिक विश्वविद्यालय में प्रवेश ले लिया । यहाँ उसकी अपनी एक सहपाठी मिलेवा मैरिक से लगाव हो गया । उसने उसमें एक साथी ढूंढ लिया । वह एक  युवा सर्वियाई युवती थी । वह वहुत ही बुद्धिमान थी । उन दोनों में प्यार हो गया और बाद में दोनों ने 1903 में शादी कर ली ।
एल्बर्ट ने सन 1900 में 21 वर्ष की आयु में स्नातक की उपाधि प्राप्त की । वह बेरोजगार था । उसने एक सहायक शिक्षक की नौकरी कर ली । 1902 में,  उसे बर्न में एक पेटेंट कार्यालय में नौकरी मिल गई । उसका कार्य दूसरे लोगों के अविष्कारों का मूल्यांकन  करने का था । वह गुप्त रुप से अपने सिद्धांतों को भी विकसित कर रहा था । उसने ‘सापेक्षता के विशेष सिद्धांत’ पर  1905 में अपना विख्यात पत्र प्रकाशित किया, जिसके अनुसार समय और दूरी अपने आप में स्वतंत्र नहीं हैं ।
आइंसटाईन के जीवन का नया अध्याय विश्व में उसके उदय से प्राप्त प्रसिद्धि से मेल खाता है । 1915 में उसने ‘सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत’ का  प्रकाशन किया , जिसने गुरुत्व-बल की एक नई व्याख्या की । आइंसटाईन ने सही –सही गणना कर ली थी कि स्थिर सितारों से कितने समय में सूर्य गुरुत्व –बल के कारण प्रकाश का अपवर्तन हो जाता है । 1921 में आइंसटाईन को भौतकी के क्षेत्र में नोबल पुरुस्कार प्राप्त हुआ । उसे सारे विश्व में सम्मान और निमंत्रण – पत्र प्राप्त हुए और मीडिया के माध्यम से प्रसिद्ध हुआ ।
जब 1933 ई. में जर्मनी में नाजीवादी पार्टी सत्ता में आई तो  आइंसटाईन जर्मनी छोड़कर अमेरिका चला गया । पांच वर्ष बाद जब जर्मनी ने नाभिकीय विखंडन किया तो अमेरिका के भौतिकीशास्त्री  परेशानी में आ गए । अपने एक सहकर्मी की सलाह पर आइंसटाईन ने अमेरिका के राष्ट्रपति फ्रिंकालिन डी. रुजवेल्ट को परमाणु बम के भारी खतरे के बारे में चेतावनी दे डाली । उसके शब्दों ने रूजवेल्ट को प्रभावित किया । अमेरिका वालों ने एक गुप्त योजना के अंतर्गत परमाणु बमों का विकास किया और अगस्त,1945 में उन्हें जापान  के हिरोशिमा और नागासाकी शहरों के ऊपर गिराया ।
आइंसटाईन  युद्ध को तबाही से बहुत अधिक विचलित हो उठा । इस बार उसने संयुक्त राष्ट्र के नाम एक लम्बा पत्र लिखा जिसमें उसने  विश्व सरकार बनाने का प्रस्ताव रखा। आइंसटाईन राजनीति में और अधिक   लेने लग गया और उसने ख्याति को शांति और लोकतंत्र की स्थापना में प्रयोग क्रिया । जव 1955 में 76 वर्ष की आयु में आइंसटाईन की मृत्यु हुई तो लोगों  ने उसे एक  महान वैज्ञानिक के साथ-साथ एक भविष्य-द्रष्टा तथा विश्व नागरिक के रूप में भी याद किया ।

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