A Baker from Goa in Hindi | Easy Language

A Baker from Goa in Hindi

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A Baker from Goa in Hindi

 By Lucia Rodrigues

 इस अंश में लेखक गोआ में अपने पुराने दिनों को याद करता है जब गाँव का बेकर (पावरोटी आदि बनाने वाला ) जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता था I यधपि, समय के बीतने के साथ लोग अब इतनी अधिक पावरोटी नहीं खाते, मगर गाँव में बेकर अब भी है I पुर्तगाली लोग पावरोटी बनाने के लिए प्रसिद्ध थे I वे गोआ को बहुत पहले ही छोड़ गए I मगर गोआ में बेकर के परम्परागत काम को अब भी देखा जा सकता है I वे भट्टियाँ जिसमें पावरोटी बनाई जाती थी अब भी वहाँ विधमान है I परम्परागत बेकरों की बाँस की छड़ी की आवाज को अभी भी सुना जा सकता है I बेकर के परिवार में से कोई-न-कोई अभी भी उस व्यवसाय और परम्परा को आगे बढ़ाए हुए है I गोआ में इन बेकरों को आज भी पेदर कहा जाता है I

लेखक याद करता है कि एक बेकर गाँव में रोज दो बार आता था I वह लेखक का मित्र एवं पथ-प्रदर्शन होता था I उसने बाँस की एक छड़ी उठाई होती थी I इस छड़ी की आवाज से लेखक और अन्य लोग नींद से जाग जाते थे I अलग-अलग घरों के नौकर पावरोटी खरीदते थे I मगर लेखक पावगजरों को खरीदने के लिए बेकर के पास भाग जाया करता था I

बेकर की बाँस की छड़ी विशेष होती थी I उस बाँस को जमीन पर पटकर वह ‘झैंग- झैंग’ की आवाज पैदा करता था I  बेकर एक हाथ में अपने सिर पर पावरोटी की टोकरी को सहारा देता था और दूसरे से वह बाँस को जमीन पर पटकता था I जब भी कोई उसके पास पावरोटी खरीदने के लिए आता था तो वह टोकरी को बाँस पर रखता था Iलेखक और अन्य लोग उसकी टोकरी में देखते थे I उन दिनों में गरम चाय के साथ पावरोटी खाने का रिवाज था I लेखक पावरोटी का इतना शौकीन था की वह इसे खाने से पहले अपने दाँत भी साफ नहीं करता था I




गाँव का बेकर प्रत्येक अवसर पर विशेष तौर पर महत्वपूर्ण होता था I गाँव वाले उस मीठी पावरोटी, जिसे ‘बोल’ कहा जाता था, के विशेष शौकीन थे I इन मीठी पावरोटियों के बिना शादी के उपहारों का कोई अर्थ नहीं था I क्रिसमस एवं अन्य त्योहारों पर सेंडविच, केक और बोलिनाह बहुत जरूरी होते थे I ये पावरोटी से बनाए जाते थे I इस प्रकार बेकर की भट्टी में बनाया जाता था I

बेकर या पावरोटी बेचने वाला एक विशेष प्रकार की पोशाक पहनता था I इसे ‘कबाई’ कहा जाता था I यह एक ही टुकड़े की लम्बी फ्रॉक होता था, यह उसके घुटनों तक जाता था I लेखक के बचपन के दिनों में बेकर ऐसी पैन्टें पहनते थे जो पूरी लम्बी पैन्ट से छोटी होती थी और आधी लंबाई की पैन्ट से लम्बी होती थी I आज भी अगर कोई आधी लंबाई की पैन्ट  पहनता है तो कहा जाता है कि उसने पेडर जैसे कपड़े पहने है I बेकर अपना बिल आमतोर पर महीने की अन्त में लेता था I घर में बेकर के महीने भर के हिसाब को किसी दीवार पर पेन्सिल से लिखा जाता था I  उन दिनों में पावरोटी बनाना फायदे का कारोबार था I बेकर लोग समृद्ध होते थे I उनके परिवार कभी भी भूखे नहीं रहते थे I  उनके मोटे शरीर इस बात को दर्शाते थे कि वे प्रसन्न है I

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