Samay ka Sadupyog Nibandh | समय का सदुपयोग पर निबंध

By | August 4, 2022
Samay ka Sadupyog Nibandh

Samay ka Sadupyog Nibandh – यही है कि प्रत्येक कार्य निश्चित समय पर कर किया जाए. उचित घड़ी बीत जाने पर किया गया कार्य निष्फल होता है. Internet ki Duniya भी ऐसी हो गयी है जिसकी वजह से हमारा को भी कार्य समय पर होने लगा है.

Samay ka Sadupyog Nibandh

समय जीवन है – फ्रैंकलीन का प्रसिद्ध कथन है – ‘वक्त को बरबाद न करो क्योंकि जीवन इसी से बना है.’ समय ही जीवन है जीवन क्या है – जीने के कुछ वक्त. मृत्यु के बाद तो समय का कोई अर्थ नहीं रह जाता. अतः समय सबसे मूल्यवान है.
समय का सदुपयोग – समय का सदुपयोग यही है कि प्रत्येक कार्य निश्चित समय पर कर दिया जाए. उचित घड़ी बीत जाने पर किया गया कार्य निष्फल होता है. गोस्वामी तुलसीदास लिखते हैं –
का बरषा जब कृषि सुखाने. समय चूकि पुनि का पछिताने.
उचित समय की अग्रिम प्रतीक्षा करनी पड़ती है. समय की उपेक्षा करने वाले को समय का रथ बुरी तरह रौंद डालता है. शेक्सपियर का कथन है – ‘मैंने समय को नष्ट किया और अब समय मुझे नष्ट कर रहा है.’
समय का नियोजन – इस प्रकार धन का उपयोग हमें सफल बनाता है, उसी प्रकार समय का नियोजन भी हमें सफलता प्रदान करता है. इसके लिए चिंतन और सावधानी आवश्यक है. मनुष्य को पता होना चाहिए कि कौन-सा काम करने का सबसे सही समय क्या है. सही टाइमिंग से ही चौके-छक्के लग सकते हैं. यूं ही बल्ला घुमाने से कुछ नहीं मिलता.
समय की पाबंदी – समय के प्रति सचेत तथा गंभीर समय का सबसे बड़ा सम्मान है. समय के पाबंद रहकर समय की बचत की जा सकती है. यदि सारी रेलगाड़ियाँ समय पर छूटे और समय से पहुंचे ; सारे उत्सव-त्योहार ठीक समय पर प्रारंभ होकर ठीक समय पर समाप्त हों और सभी कार्य निश्चित समय पर हों तो सभी मनुष्यों का समय बच सकता है. राष्ट्रपिता गांधी जी समय के पाबंद थे. वे एक मिनट की देरी को भी देरी मानते थे.
सफलता में समय की भूमिका – जीवन में सफलता पाने के लिए समय की अनुकूलता का होना आवश्यक है. यदि समय अनुकूल न हो तो मनुष्य के सारे प्रयत्न निष्फल हो जाते हैं. पढ़ाई के वक्त पढ़ाई, खेल के समय खेल, शादी के समय मौज और गृहस्थी के समय जिम्मेदारी – ये सब वक्त पर ही अच्छे लगते हैं. जो व्यक्ति ऐसा नहीं करता, वह वक्त के थपेड़े खाता रहता है.