The Tale of Melon City- Summary in Hindi – Full Text

By | October 7, 2021
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       The Tale of Melon City

                                                  By- Vikram Seth

Summary in Hindi/ The Tale of Melon City

Complete Summary

एक समय एक न्याप्रिय तथा ठंडे दिमाक बाला राजा राज्य कर रहा था उसने प्रमुख राजमार्ग के ऊपर एक टोररड दयारा बनबाने का निष्चय किया उसका उद्देस्य था की दर्शको का मानशिक तथा नैतिक उठान हो जाए

मजदूरों ने दोयार बनबा दिया उनका साहस न था कि राजा की अवहेलना करे राजा सोयम राजमार्ग पर लोगो को अपना दर्शन देने के लिए निकल पढ़ा हुआ ये कि दयार कि उचाई कम होने से राजा का मुकुट टकराकर गिर गया राजा आग- बबूला हो गया उसने इसे अपमान समझा उसने आदेश दिया कि इस दोयार को बनाने बाले को फाशी दे दी जाए इस मृत्यु दंड के तैयारी कर ली गयी बिल्डरों का प्रमुख जब राजा के सामने से गुजरा तो उसने कहा मई तो निर्दोष हूँ सारा दोष मजदूरों का था

राजा ने मृत्यु दंड को कुछ समय के लिए टाल दिया न्याप्रिय और गभींर सोभाव होने के कारण उसने निर्माता को माफ़ कर दिया तथा सभी मजदूरों को फाशी देने का आदेश दे दिया मजदूरों ने सारा दोष ईट

बनाने बाले के सिर पर मढ़ दिया जिन्होने गलत आकर की ईट बनाई थी राजा ने फिर राजगीरों को बुला भेजा; बे भय से काँपते सामने खड़े थे उन्होने बाश्तुकार को इतना नीचा दोयार बनाने के लिए दोषी बताया अब बास्तुकार की बारी आ गयी कि उसे फाशी दी जाए बास्तुकार के पास भी अपने बचाव के लिए एक बहाना था उसने राजा को याद दिलाया कि दोयार के नक्शे में फेरबदल तो सोयम राजा ने ही की थी राजा ये सुनकर पीला पढ़ गया इसलिए उसने कहा कि मामला जटिल है और उसे सलाह लेनी पड़ेगी उसने देश के शर्बाधिक बुद्धिमान व्यक्ति को पेश किये जाने का आदेश दिया  एक अति बृद्ध पर अनुभवी व्यक्ति को राजा के सामने उपश्तिथ किया गया उसने सुझाव दिया कि राजा का काम है अपराधी को दंड देना तथा इस मामले में अपराधी तो दोयार था इसलिए इस मेहराबदार दोयार को फाशी की टिकटी की ओर ले जाया गया पर अचानक एक मंत्री दोयार के बचाव में बोल पढ़ा की दोयार को फाशी नहीं दी जा सकती क्योकि उसने  तो राजा का मस्तक ही सादर छुआ था

राजा बात  मान  गया पर अब जनता विदद्रोहों करने लगी बे तो किसी को दण्डित किये जाने की मांग कर रहे थे इसलिए राजा ने किसी को लटकाने के लिए एक फंदा बनबाया पर बह भी उचाई पर था अनेक लोगो की लम्बाई का माप लिया गया पर केवल राजा ही उस फंदे पर लटकने के लिए उपयुक्त पाया गया और उसे फाशी दे दी गयी

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मंत्री गढ़ों को बहुत राहत मिल गयी लोग अब शांत हो चुके थे अगला काम था दूसरे शाशक की खोज करना घोसड़ा राज्य की रीती के अनुशार की गयी एक मुर्ख नगर दोयार से गुजरा रच्छको ने उसे रोक लिया तथा   कहा कि नए राजा का चयन करो मुर्ख को तरबूज ही पसंद थे इसलिए बह सभी प्रश्नो का एक ही उत्तर देता रहा -तरबूज या खरबूजा

मंत्रियो ने उस मुर्ख को ही न्य साशक चुन लिया उन्होंने सिंघाशन पर एक तरबूज की इस्थापना कर दी

ये घटना बहुत पुराने समय की है पर यदि आज भी आप लोगो से पूछे कि आपका शाशक तरबूज जैसा क्यों दिखता है तो बे कहते है कि इसका कारण तो देश में राजा  के चयन की प्रिक्रिया की रीती है उनकी अपनी राय का कोई महत्य नहीं है और उन्हें इसी रीती से तब तक कोई शिकायत भी नहीं है जब तक उन्हें शांति और आज़ादी से रहने दिया जाता है 

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