Summary of Chapter We’re Not Afraid to Die in Hindi

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Summary of Chapter We’re Not Afraid to Die in Hindi

By- Gordon Cook and Alan East

यह घटना है जुलाई 1976 की जब लेखक अपनी पत्नी Mary, बेटाJonathanतथा बेटी Suzanne के साथ इंग्लैंड पर Plymouth से विश्व का चक्कर चक्कर लगाने निकल पड़े थेI बेटा मात्र 6 वर्ष का था और बेटी की आयु थी सातवर्षI लेखक स्वयं से 37वर्षीय व्यवसायी था Iपर उसका सपना खोजयात्री का था I वह तो 200 वर्ष पूर्व केप्टन जेम्स कुक की यात्रा को दोहराना चाहता था I16 वर्षों तक वह अपनी समुद्री यात्रा करने के कौशल को इंग्लैण्ड के समुद्र में सुधारता रहा Iउसने अपनी सारी जमापूँजीएक ‘वेववाकर’ नामक नौका के निर्माण तथा उसके परीक्षण में लगा दी थी Iयह जलपोत 23 मीटर लम्बा और 30टन वजन का थाI इसका निचला भाग लकड़ी के तख्तों से बना थाI

इन लोगों को तीन वर्षों में 100,000 कि.मी. से अधिक दूरी तय करनी थीI यात्रा का पहला चरण दक्षिण अफ्रीका के केपटाऊन तक का था, और यह सुरक्षित पूरा हो गयाI पूर्व की ओर जाने से पहले लेखक ने दो नाविकों को साथ ले लिया, यह थे अमेरिका के Larry Vigil तथा स्विस के Herb Seigler Iवह जानता था कि दक्षिणी हिंद महासागर बहुत उग्र तूफानी और खतरनाक था Iजैसे ही वे केप  टाउन से पूर्व की ओर चले, उन्हें आँधी-तूफान का सामना करना पड़ा जो कुछेक सप्ताहों तक चलते रहेI पर आँधी से उतना अधिक डर उसे नहीं लगा जितनाऊँची लहरों से, जो प्रमुख मस्तूल जितनी ऊँची थीI

दिसंबर 25 को नाव केप टाऊन से 3500 किमी. की दूरी पर थीI इतनी खराब मौसम के बावजूद उन्होंने क्रिसमस मनाई Iउन्हें अभी भी आशा थी कि तूफान थम जाएगा,और परिवर्तन आया भी पर पहले से स्थिति अधिक बुरी हो गईI

जनवरी 2 की प्रातः लहरें बहुत ऊँची उठने लगीं I उन्होंने नाव की गति कर दी I नाव हर लहर के शिखर पर पहुँच जाती थीI पवन चीखें मार रहा था Iनौका की गति और कम करने के लिए तूफान वाला पाला नीचे गिरा दिया और एक वजनी फंदा नाव के पिछले भाग में लगा दियाI सभी ने जीवन रक्षक जैकेटें पहन ली Iफिर भी वे आने वाली भीषण आपदा की प्रतीक्षा करने लगेI

आसन्न विपदा का पहला लक्षण वातावरण में बिखरी शांति के रूप में दिखाई दियाI पवन अचानक थम गई और आकाश काला पड़ गयाI दहाड़ के साथ एक-मेघ जैसी चीज में नाव को टक्कर मार दी I यह तो वास्तव में एक विशाल ऊँची लहर थी Iऐसा लगा कि मृत्यु निकट आ गई हैI दहाड़ गर्जन में बदल गई Iनाव का पिछला भाग ऊपर उठने लगा Iएक विस्फोट के साथ जहाज की छत हिल गईIएक लहर नाव पर आ गिरी तथा लेखक का सिर चक्र से टकरा गया Iउसे लगा कि वह लहरों के नीचे डूब रहा है पर उसने आशा और धैर्य नहीं छोड़ाI

नाव जैसे पलटने लगी थीI मस्तूल नीचे समतल गिर गएI लेखक ने रेलिंग पकड़ ली Iवह जहाज की छत पर इस प्रकार से चक्कर खा गया जैसे वह पुराने कपड़ों से बनी कोई गुड़िया हो Iउसकी छाती की हड्डी चटक गई तथा उसके दाँत भी टूट गए, उसके मुँह में खून भर गयाI पर वह उस चक्र को पकड़े रहाI

चारों ओर जल ही जल था Iपानी तो नाव के निचले भाग में भी बहकर पहुँच गया था पर सही स्थिति का आकलन करने का कोई उपाय न था अचानक छत पर बने छेद के ऊपर रखा ढक्कन फाटक से खुला IMary चीखकर बोली कि जहाज के निचले भाग में पानी भर गया हैIलेखक ने उसे बोला कि इस चक्र को सँभालो Iवह स्वयं ढक्कन के पास उसे छेद पर रखने के लिए भागा Iदोनों सहायक कर्मचारी Larry और Herb जी-जान से पानी को पंप द्वारा बाहर निकालने में जुटे थे Iनाव का पार्शव भाग अन्दर की ओर धँसगया था Iकपड़े, नक्शे तथा कप –प्लेटें खिलौनों की भाँति पानी में तैर रही थे I लेखक बच्चों के केबिन में गया तथा उन्हें ऊपर की शयन बर्थ पर सुरक्षित पायाI पर बेटी Sue के सिर पर चोट से गुमड़ा उभर आया थाI

लेखक ने एक हथौड़ी, तथा किरमिच आदि लिए और उस छेद की मरम्मत कर दी Iअब पानी का बहाव बगल की ओरबहकर जाने लगा, नीचे नहीं जा रहा थाI

रात बहुत ठण्डी थी Iउन्होंने सहायता के लिए रेडियो सिंगनल चारों ओर भेजें Iलड़की के सिर पर सूजन आ गई थी तथा उसकी आँखें काली पड़ गई थी Iलेखक तथा उसके अन्य सभी साथियों ने बारी-बारी से दो-दो घंटे आराम कियाI15 घंटे बीत चुके थे पर पहली बार लहर ऊपर आई थी Iपर नाव कोक्षति बहुत अधिक हो चुकी थी यह संभव नहीं लग रहा था कि वह उन्हें ऑस्ट्रेलिया तक ले जाएगीIलेखक ने नक्शों को देखा तथा उसे दो टापू नक्शे में दिख गए Iआइल एमस्टर्डमतो फ्रांस का विज्ञान अनुसंधान केंद्र था Iअब इन लोगों को यही उम्मीद थी कि किसी प्रकार से उस टापू पर पहुँचा जाए Iउन टापुओं की ओर नाव की दिशा मोड़ दीI उन्होंने दोदिनों पश्चात कुछ गोश्त तथा बिस्कुट खाएI

चारबजे शाम को काले बादल पुनःघिरने लगेIमौसम सारी रात खराब रहा 5 जनवरी प्रातःकाल लेखक बच्चों को ढाढसबँधाने गया Iबेटी Jon ने पूछा क्या हम लोग मर जाएँगेIउसने साथ ही बोला हम लोग मरने से नहीं डरते बशर्ते हम चारों एक साथ बने रहते हैंI

उस शाम Mary तथा लेखक को लगा कि उनका अंत अब निकट आ गया हैI पर नाव तो तूफान से बचकर निकल आई I6 जनवरी प्रातः हवा कमजोर पड़ गई थीI लेखक ने स्थिति का आकलन किया जब वह बैठा सोच रहा था, बेटी Sue पास आ गई तथा उसने अपना बनाया एक कार्ड पापा को दिया Iउस कार्ड पर उसने मामा और डैड का व्यंग चित्र बना रखा था ताकि देखकर उन्हें हँसी आ जाएIलेखक को आशा बँधीकिवे लोग टापू के पास शाम पॉंचबजे तक पहुँचजाएँगे फिर वह नीचे चले गएI6बजे Jonathan तथा Sue ने उसे जगाया ताकि खुशखबरी दे देंI टापू Amsterdam अब दिखाई दे रहा था अगली प्रातः टापू के सभी 28 कर्मियों ने इन लोगों का स्वागत किया लेखक ने अपने दोनों सहायकों तथा छोटे बच्चों को उनकी सहायता तथा सहिष्णुता के लिए धन्यवाद दियाI

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