Summary of How I Taught My Grandmother to Read- English & Hindi

By | April 3, 2023
Summary of How I Taught My Grandmother to Read- English & Hindi

Short Summary of the Lesson How I Taught My Grandmother to Read in English

We are giving the Summary of the lesson in 2 ways. Following is the summary in short in very simple language.
This is the story of an old woman aged 62 who desired to start learning to read and write. Her 12 years old granddaughter was her teacher. The teaching and learning were completed well and now the granddaughter is telling us about the whole episode.
The name of the granddaughter is Sudha Murty. She is telling us about the time when she was 12 years old and she used to stay with her grandparents in a village in north Karnataka. Her grandma could not study well because of a lot of responsibilities of her life. A major part of her life was spent looking after the family. Unfortunately, She remained uneducated.

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The writer Sudha Murty tells how she taught her grandmother to read. Actually, Grandmother was fond of a story, Kashi Yatre, which was a novel that was printed in the magazine. The name of the Magazine was Karamveera. Unfortunately, grandma could not read that story so she asked others to read the story for her. But when Sudha Murty was with her she used to read that story to her grandmother.
Once, the narrator went for a week to a neighbouring village to attend a wedding. Grandmother had no one to read that week’s episode.
At that time grandma realized how dependent she was on- others. She realized the importance of literacy and independence which is gained using education. When the granddaughter came back the grandma named Kristikka asked her to teach her how to read.
The grandma was 62 years old then. The narrator tells that she laughed in the beginning at the idea of a sixty-two-year-old and grey-haired lady trying to learn to read but soon she understood that it was really praiseworthy that her grandma wanted to learn.
She started to teach her grandmother. Grandma set a deadline for herself. It was the festival of Dassara. She vowed that she would hold a pooja dedicated to Saraswati, the Goddess of learning.
She achieved her target. On the Pooja day, the grandma was able to read on her own. She gifted her granddaughter a frock material. As a mark of gratitude and respect, she touched the feet of her twelve-year-old teacher.
The Child was shocked at what her grandma was doing. She also touched her grandmother’s feet and gifted her ‘Kashi Yatre’ which by this time had been published as a novel. The grandmother read out the title of the book, the writer’s name, and the publisher’s name without any mistakes. This gave ‘the teacher’ a lot of joy because her student had passed with flying colours.

How I Taught My Grandmohter to Read- Class- 9 English Communicative- Hindi Summary

Summary in Hindi

यह 62 साल की एक बूढ़ी औरत की कहानी है जो पढ़ना और लिखना सीखना शुरू करना चाहती थी। उसने अपनी 12 साल की पोती अपनी शिक्षिका बनाया | पठन-पाठन शुरू किया गया और अच्छी तरह से संपन्न भी हुआ और अब पोती हमें पूरे प्रकरण के बारे में बता रही है।
पोती का नाम सुधा मूर्ति है। वह हमें उस समय के बारे में बता रही हैं जब वह 12 साल की थीं और उत्तरी कर्नाटक के एक गांव में अपने दादा-दादी के साथ रहती थीं। बात कुछ ऐसी थी कि जीवन की बहुत सारी जिम्मेदारियों के कारण उनकी दादी अच्छी तरह से पढ़ाई नहीं कर पाई थीं । उनके जीवन का एक बड़ा हिस्सा परिवार की देखभाल में व्यतीत हुआ। दुर्भाग्य से, वह अशिक्षित रही।
लेखिका सुधा मूर्ति बताती हैं कि कैसे उन्होंने अपनी दादी को पढ़ना सिखाया। दरअसल, दादी को एक कहानी काशी यात्रा का शौक था, जो एक उपन्यास था और इस उपन्यास का एक एक एपिसोड एक पत्रिका में हर हफ्ते छपा करता था पत्रिका का नाम कर्मवीरा था। दुर्भाग्य से, दादी उस कहानी को नहीं पढ़ सकीं इसलिए उन्होंने दूसरों से उनके लिए कहानी पढ़ने को कहना पड़ता था| लेकिन जब सुधा मूर्ति उनके साथ होती थीं तो वह वह कहानी अपनी दादी को पढ़कर सुनाती थीं।
एक बार, सुधा मूर्ती एक सप्ताह के लिए पड़ोस के एक गाँव में एक शादी में शामिल होने चली गयी । दादी मां के पास उस हफ्ते का एपिसोड पढ़ने वाला कोई नहीं था।
उस समय दादी को एहसास हुआ कि वह दूसरों पर कितनी निर्भर थीं । उन्होंने साक्षरता और स्वतंत्रता के महत्व को महसूस किया और उन्होंने पढ़ाई करने का निश्चय किया । जब पोती वापस आई तो दादी ने उनसे अपनी पोती के सामने अपनी इक्षा जाहिर की और उनसे अपनी पोती से कहा की वह पढना लिखना सीखना चाहती थीं।
उस समय दादी 62 साल की थीं। सुधा मूर्ती बताती हैं कि जब उन्होंने अपनी दादी को पढ़ाने की बात सुनि तो शुरुआत में उन्हें हंसी आ गई. लेकिन जल्द ही वह समझ गई कि यह वास्तव में प्रशंसनीय है कि उसकी दादी सीखना चाहती थी।
उन्होंने अपनी दादी को पढ़ाना शुरू किया । दादी ने अपने लिए एक समय सीमा तय की। उन्होंने सोचा था की वो दशहरे के त्यौहार तक पढना लिखना सीख जाएँगी| उसने प्रण किया कि पढना लिखना सीख कर विद्या की देवी सरस्वती को समर्पित एक पूजा भी आयोजित करेंगी|
दादी ने बहुत मेहनत की और अपना लक्ष्य हासिल कर लिया। पूजा के दिन दादी जी अपने आप पढ़ पा रही थीं। उन्होंने अपनी पोती को फ्रॉक मटीरियल गिफ्ट किया। कृतज्ञता और सम्मान की निशानी के रूप में, उसने अपने बारह वर्षीय शिक्षिका के पैर भी छुए।
दादी जो कर रही थीं उसे देखकर बच्चा हैरान रह गया। सुधा मूर्ती ने भी अपनी दादी के पैर छुए और उन्हें ‘काशी यात्रा’ उपहार में दी, जो इस समय तक एक उपन्यास के रूप में प्रकाशित हो चुकी थी। पहले इसके एपिसोड्स मैगज़ीन में हर हफ्ते छपते थे| दादी ने किताब का शीर्षक, लेखक का नाम और प्रकाशक का नाम बिना किसी गलती के पढ़कर सुना दिया। इससे ‘अध्यापिका’ को बहुत खुशी हुई क्योंकि उनकी छात्रा अच्छे अंकों के साथ उत्तीर्ण हुई थी।

Detailed Summary of the Lesson How I Taught My Grandmother to Read in English

Following is the summary in detail in for some advanced learners-

Summary in Detail- How I Taught My Grandmother to Read

The narrator, of the lesson, is Sudha Murty. She is telling the episode of the time when she was 12 years old. She used to stay with her grandmother in a village in north Karnataka. Her loving grandmother poured all her love on her and both of them had a good relationship.
पाठ की वर्णनकर्ता सुधा मूर्ति हैं। वह उस वक्त का किस्सा बता रही हैं जब वह 12 साल की थीं। वह उत्तरी कर्नाटक के एक गांव में अपनी दादी के साथ रहती थीं । सुधा मूर्ती और उनकी दादी दोनों एक दुसरे को बहुत प्यार करते थे|
the grandmother remained uneducated because when she was young she had to bear a lot of responsibilities. Time kept passing and the responsibilities were no doubt reduced but the lady remained uneducated. Now the Grandmother whose name is Kristikka is very much fond of a novel named Kashi Yatre. Its episodes are weekly published in a magazine named Karamveera. The old lady asks someone to read that story every week. Sometimes the granddaughter Sudha Murty reads the next episode. This way life was going smoothly.
दुर्भाग्यवश दादी जी अशिक्षित रह गईं थीं क्योंकि जब वह छोटी थीं तो उन पर बहुत सारी जिम्मेदारियां आ गयी थीं । समय बीतता गया और जिम्मेदारियां बेशक कम होती गईं लेकिन वह अशिक्षित रहीं । अब दादी जिनका नाम कृतिक्का है, उन्हें काशी यात्रा नाम का उपन्यास बहुत पसंद था । कशी यात्रे नावेल के एपिसोड हर हफ्ते करमवीरा नाम की पत्रिका में साप्ताहिक रूप से प्रकाशित होते थे । दादी जी हर हफ्ते अपनी पोती सुधा मूर्ती से वह कहानी पढ़ने को कहती थीं । पोती सुधा मूर्ति अगला एपिसोड पढ़ देती थीं और इस तरह जीवन सुचारू रूप से चल रहा था।
The Grandma was so interested to know the next episode because in that novel Kashi Yatre there was an old lady who was struggling to go to Kashi and worship the lord. For this purpose, she saved money throughout her life. At the same time, the grandmother also had the same wish to go to Kashi. So the grandmother used to compare her own character with the character of that lady.
दादी माँ को अगला प्रसंग जानने की इतनी दिलचस्पी रहती थी क्योंकि उस उपन्यास काशी यात्रा में एक बूढ़ी औरत थी जो काशी जाने और भगवान की पूजा करने के लिए संघर्ष कर रही थी। इस उद्देश्य के लिए, उसने जीवन भर पैसे बचाए। वहीं दादी की भी यही इच्छा थी कि काशी जाऊं और इश्वर की पूजा करूँ। तो दादी अपने चरित्र की तुलना उस महिला के चरित्र से करती थी। मतलब नावेल में जो भी होता था दादी को लगता था कि वो उनके जीवन का हिस्सा है|
Another reason for the grandmother to be so interested in the novel was that the writer Triveni had a simple and engaging style. She wrote about ordinary people and their day-to-day problems.
उपन्यास में दादी माँ की इतनी दिलचस्पी होने का एक और कारण यह था कि लेखिका त्रिवेणी जिन्होंने कशी यात्रे लिखा था उनकी भाषा बहुत ही सरल थी और वे आम लोगों और उनकी दिन-प्रतिदिन की समस्याओं के बारे में लिखा करती थीं ।
During those days the transport system was not all that good, so the morning newspaper reached the village by afternoon and the weekly magazines arrived one day late.
उन दिनों परिवहन व्यवस्था इतनी अच्छी नहीं थी, इसलिए सुबह का अखबार गांव में दोपहर तक पहुंच जाता था और साप्ताहिक पत्रिकाएं एक दिन देरी से पहुंचती थीं।
Sudha’s grandmother followed the story very regularly. Every Wednesday when the weekly magazine arrived she made her granddaughter read out the episode to her. She would then discuss the story with her friends in the temple courtyard. It was then followed by a great debate.
सुधा की दादी कहानी का नियमित रूप से सुनती थीं | हर बुधवार को जब साप्ताहिक पत्रिका आती तो वह अपनी पोती को अगला एपिसोड पढ़कर सुनाने को बोलती थीं । फिर वह मंदिर के प्रांगण में अपने दोस्तों के साथ कहानी पर चर्चा करती। इसके बाद वहीं पर दादी जी की अन्य लोगों के साथ चर्चा होती थीं. अर्थात नावेल में जो भी होता था उस पर दादी जी एवं अन्य लोग बातें किया करते थे
Once the granddaughter means Sudha Murty went for a wedding in a neighbouring village with her cousins. Though she had gone there for just two days, she enjoyed herself so much in this village that she ended up staying there for a week.
एक बार पोती यानी सुधा मूर्ति अपनी चचेरी बहनों के साथ पड़ोस के गांव में शादी समारोह में चली गयीं । हालाँकि वह वहाँ सिर्फ दो दिनों के लिए गई थी, लेकिन उसने इस गाँव में इतना आनंद लिया कि वह वहाँ एक सप्ताह के लिए रुकीं
In the meantime, ‘ Karmaveera’ the weekly magazine arrived as usual on Wednesday but there was no one to read out the new episode of the story to the grandmother. She was very restless to know what would happen next in the story the grandmother ran her fingers all over the pages to know what was written on them. But of course, it was useless. She could not understand anything.
इतने में बुधवार को साप्ताहिक पत्रिका ‘कर्मवीरा’ आ गई पर दादी को कहानी का नया प्रसंग पढ़कर सुनाने वाला कोई नहीं था। कहानी में आगे क्या होगा यह जानने के लिए वह बहुत बेचैन थीं । दादी जी पत्रिका के पन्नों पर अपनी उंगलियाँ रगडती रहीं लेकिन जाहिर है, यह बेकार था. उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था।
Also, the lady did not ask anyone to read that for her because it would be somewhat insulting to the grandmother. she was a very sensitive lady that’s why she also didn’t go to the neigbouring village to ask her granddaughter to read it to her.
साथ ही, दादी जी ने किसी को भी उसे पढ़ने के लिए नहीं कहा क्योंकि यह दादी के लिए यह कुछ हद तक अपमानजनक लगता। वह बहुत ही संवेदनशील महिला थीं इसलिए वह अपनी पोती को पढ़ने के लिए कहने के लिए पड़ोस के गांव भी नहीं गईं।
The grandma, Kristikka felt so helpless and dependent that she regretted her luck that she could not get a chance to study. Now she did not repent for long but she decided to start her study at the age of 62.
दादी, कृतिका खुद को इतना असहाय और आश्रित महसूस करती थीं कि उन्हें अपने भाग्य पर पछतावा हुआ कि उन्हें पढ़ने का मौका नहीं मिला। अब उन्हें ज्यादा समय तक पछतावा नहीं हुआ लेकिन उन्होंने 62 साल की उम्र में पढ़ाई शुरू करने का फैसला किया।
When the granddaughter Sudha Murty came back from the neighbouring village, she saw that her grandmother was in tears. On asking what the matter was, the grandma didn’t answer. Later, in the middle of the night, she came to her grandchild and told her that she was sad about not being able to read the novel on her own.
पोती सुधा मूर्ति जब पड़ोस के गांव से वापस आई तो उसने देखा कि उसकी दादी की आंखों में आंसू हैं। मामला क्या है पूछने पर दादी ने कोई जवाब नहीं दिया। बाद में, आधी रात में, वह अपनी पोती के पास आयी और उसे बताया कि वह इस बात से दुखी है कि वह अपने आप उपन्यास नहीं पढ़ सकी।
She expressed her wish to learn the Kannada alphabet and asked the child to teach her. The granddaughter laughed a little at the idea that a sixty-two-year-old, grey-haired lady would be a student. However, this didn’t bother the old lady because she was wise.
उसने कन्नड़ वर्णमाला सीखने की इच्छा व्यक्त की और बच्चे को उसे पढ़ाने के लिए कहा। पोती इस विचार पर थोड़ी हँसी कि एक बासठ वर्षीय, भूरे बालों वाली महिला एक छात्रा बनेगी । हालाँकि, इस हंसी के कारण दादी माँ परेशान नहीं हुयीं क्योंकि वह समझदार थीं ।
She assured the child that she would work very hard and learn to read by Saraswati Pooja during Dassara. Seeing her grandmother’s enthusiasm and determination, Sudha accepted to be her teacher and taught her with utmost love and sincerity.
उन्होंने बच्चे को विश्वास दिलाया कि वह बहुत मेहनत करेंगी और दशहरा के दौरान सरस्वती पूजा तक पढ़ना सीखे लेंगी । अपनी दादी के उत्साह और दृढ़ संकल्प को देखकर, सुधा ने उनकी शिक्षिका बनना स्वीकार कर लिया और उन्हें बेहद प्यार और ईमानदारी से पढ़ाया।
By the Saraswati Pooja, the grandmother was actually able to read on her own. She was now an independent woman. On Pooja day, she gifted her granddaughter a frock material. As a mark of gratitude and respect, she touched the feet of her twelve-year-old teacher.
सरस्वती पूजा के तक , दादी वास्तव में अपने दम पर पढ़ने में सक्षम थीं। वह अब एक स्वतंत्र महिला थी। पूजा के दिन उन्होंने अपनी पोती को फ्रॉक मटीरियल गिफ्ट किया। कृतज्ञता और सम्मान की निशानी के रूप में, उसने अपने बारह वर्षीय शिक्षक के पैर छुए।
The child was surprised that the opposite was happening that day. An elder was touching the feet of a younger one. She also touched her grandmother’s feet and gifted her ‘Kashi Yatre’ which had by this time been published as a novel. The grandmother read out the title of the book, the writer’s name, and the publisher’s name without any mistakes. This gave the teacher a lot of joy because her student had been successful in reading on her own and then onwards she was independent.
बच्ची हैरान थी कि उस दिन सब कुछ विपरीत हो रहा था। एक बड़ा छोटों के पैर छू रहा था। उन्होंने अपनी दादी के पैर भी छुए और उन्हें ‘काशी यात्रा’ उपहार में दी, जो इस समय तक एक उपन्यास के रूप में प्रकाशित हो चुकी थी। दादी ने किताब का शीर्षक, लेखक का नाम और प्रकाशक का नाम बिना किसी गलती के पढ़कर सुना दिया। इससे शिक्षिका को बहुत खुशी हुई क्योंकि उनकी छात्रा अपने आप पढ़ने में सफल हो गई थी और फिर उन्होंने काफी वह स्वतंत्र महसूस किया क्योंकि अब पढने के लिए उनको किसी की भी सहायता लेने की जरूरत नहीं थी।