NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kritika Chapter – 5 किस तरह आख़िरकार मैं हिंदी में आया

By | February 10, 2021

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitiz Chapter 5 किस तरह आख़िरकार मैं हिंदी में आयायहाँ सरल शब्दों में दिया जा रहा है|  NCERT Hindi book for class 9 Kritika Solutions के Chapter 5 किस तरह आख़िरकार मैं हिंदी में आया  को आसानी से समझ में आने के लिए हमने प्रश्नों के उत्तरों को इस प्रकार लिखा है की कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक बात कही जा सके| इस पेज में आपको NCERT solutions for class 9 hindi Kritika

दिया जा रहा है|

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kritika Chapter 5 किस तरह आख़िरकार मैं हिंदी में आया

Class 9 Hindi Kritika Chapter 5 किस तरह आख़िरकार मैं हिंदी में आया

प्रश्नअभ्यास

1.वह ऐसी कौन सी बात रही होगी जिसने लेखक को दिल्ली आने के लिए बाध्य कर दिया?

उत्तर:- लेखक के अनुसार कुछ लोगों का स्वभाव ऐसा होता है कि वे किसी के द्वारा कही गई कटु बातों को सहन नहीं कर पाते हैं। उस बात का परिणाम भविष्य में अच्छा होगा या बुरा, इसे समझे बिना उस पर कोई तात्कालिक कदम उठा लेते हैं। लेखक भी किसी के द्वारा समय-असमय कही गई बातों को सहन नहीं कर पाया होगा।उसकी बातें लेखक के मन को गहराई तक बेध गई होंगी। उसी कटु बात से व्यथित हो वह दिल्ली जाने के लिए बाध्य हो गया होगा।उससे यह कहा जा सकता है कि वे उस समय बेरोजगार थे और किसी ने उन्हें ऐसी कोई बात कही थी जिससे वे बहुत आहत हो गए और उसी हालत में अगली बस से दिल्ली आ पहुंचे।

2. लेखक को अंग्रेजी में कविता लिखने का अफ़सोस क्यों रहा होगा?

अंग्रेजी में कविता

उत्तर:- लेखक अपनी कविता उर्दू व अंग्रेज़ी में ही लिखता था। अपने हिंदी लेखक मित्रों की संगति में आकर ही उसे हिंदी के प्रति आकर्षण पैदा हुआ। तब उसे अपने द्वारा अंग्रेज़ी में कविता लिखने का अफ़सोस हुआ। क्योंकि उस के घर का माहौल खालिस उर्दू था इसलिए उसे उर्दू में महारत हासिल थी। अपनी अभिव्यक्ति को व्यक्त करने के लिए वह अंग्रेज़ी व उर्दू दो भाषाओं पर आश्रित था। हिंदी के संपर्क में आकर उसे अपनी भूल का अहसास हुआ और वह हिंदी का लेखक बन गया।

3. अपनी कल्पना से लिखिए कि बच्चन ने लेखक के लिए ‘नोट’ में क्या लिखा होगा?

उत्तर:- बच्चन साहब लेखक को इलाहाबाद बुलाना चाहते थे; इसलिए हो सकता है कि उस नोट में उन्होंने उसी के बारे में लिखा हो और बोला हो कि तुम बहुत ही अच्छा लिखते हो और तुम्हें इलाहाबाद आकर मेहनत करनी चाहिए। एक दिन तुम जरूर बहुत आगे तक जाओगे।

4. लेखक ने बच्चन के व्यक्तित्व के किनकिन रूपों को उभारा है?

उत्तर:- लेखक के अनुसार बच्चन जी के व्यक्तित्व के निम्नलिखित रुप इस प्रकार हैं:

1-बच्चन जी एक सहृदय कवि थे।

2-बच्चन दूसरों की मदद करने हेतु समर्पित व्यक्ति थे। लेखक की कविता से ही वह इतने प्रसन्न थे कि उनकी पढ़ाई का ज़िम्मा उन्होंने अपने सर पर ले लिया था।

3-बच्चन जी प्रतिभा पारखी व्यक्ति थे। लेखक की प्रतिभा का आकलन कर उन्होंने उसको आगे पढ़ने के लिए प्रेरित किया था।

4-लेखक के अनुसार बच्चन की तुलना करना बहुत मुश्किल था। उनके अनुसार वह साधारण और सहज (दुष्प्राप्य) व्यक्ति थे। असाधारण शब्द तो जैसे उनकी मर्यादा को कम करने जैसा था

इस पेज में आपको NCERT solutions for class 9 hindi Kritika दिया जा रहा है| हिंदी स्पर्श के दो भाग हैं | Hindi Kritika सीबीएसई बोर्ड द्वारा class 9th के लिए निर्धारित किया गया है | इस पेज की खासियत ये है कि आप यहाँ पर ncert solutions for class 9 hindi Kritika pdf download भी कर सकते हैं| we expect that the given class 9 hindi Kritika solution will be immensely useful to you.

5. बच्चन के अतिरिक्त लेखक को अन्य किन लोगों का तथा किस प्रकार का सहयोग मिला?

उत्तर:- बच्चन के अतिरिक्त लेखक को निम्नलिखित लोगों का सहयोग भी मिला:-

(क). तेज बहादुर– ये लेखक के बड़े भाई थे, जो उस आर्थिक-तंगी के समय में उन्हें कभी-कभी पैसे भेज देते थे।

(ख). बच्चन के पिता- इलाहाबाद में उनके लोकल गार्जियन बने और उन्होंने कवि को उर्दू-फारसी की सूफी नज़्मों का एक संग्रह भी दिया था।

(ग). कवि का ससुराल पक्ष- जब लेखक देहरादून वापस आए, तब उन्होंने अपने ससुराल वालों की दुकान पर कंपाउंडरी सीखी।

(घ). सुमित्रानंदन पंत- इनकी वजह से लेखक को इंडियन प्रेस से अनुवाद का काम मिला था, जिससे इलाहाबाद में उनका गुजारा चल सका।

6. लेखक के हिंदी लेखन में कदम रखने का क्रमानुसार वर्णन कीजिए।

हिंदी लेखन में कदम रखने

उत्तर:- सन् 1937 में लेखक की मुलाकात ‘पंत’ और ‘निराला’ जैसे साहित्यकारों से हुई। उनसे प्राप्त संस्कार, इलाहाबाद-प्रवास और इलाहाबाद को साहित्यिक वातावरण और मित्रों से मिलने वाले साहित्यिक सानिध्य ने लेखक को बहुत प्रभावित किया। उस समय तक लेखक की कुछ कृतियाँ ‘सरस्वती’ और ‘चाँद” पत्रिका में छप चुकी थीं। इसी बीच बच्चन जी ने उसे एक नए प्रकार के स्टैंजा के बारे में बताया जिसमें लिखने का प्रयास लेखक ने किया। संयोग से ‘सरस्वती’ पत्रिका में छपी एक रचना ने ‘निरालाजी का ध्यान आकृष्ट किया। लेखक ने कुछ निबंध लिखे। इसके बाद वह ‘रूपाभ’ ऑफिस में प्रशिक्षण लेकर ‘हंस’ के कार्यालय में चला गया। इस प्रकार लेखक ने क्रमशः हिंदी जगत् में प्रवेश किया।

7. लेखक ने अपने जीवन में जिन कठिनाइयों को झेला है, उनके बारे में लिखिए।

उत्तर:- पाठ को पढ़ने से पता चलता है कि लेखक को अपने जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। लेखक किसी के द्वारा कटु एवं व्यंग्योक्ति सुनकर जिस स्थिति में था उसी स्थिति में दिल्ली जाने के लिए तैयार हो गया। उस समय उसकी जेब में पाँच-सात रुपये ही थे। वह दिल्ली के उकील आर्ट स्कूल में प्रवेश लेना चाहता था जो आसान न था। फिर भी उसने करोलबाग में किए के कमरे में रहकर पेंटिंग सीखी।इस अवधि में वह भाई के भेजे कुछ पैसे के साथ-साथ साइनबोर्ड आदि की पेंटिंग करके कुछ कमाता रहा। उसकी पत्नी की मृत्यु टी.बी. से हो गई। वह दुखी मन से दिल्ली को सड़कों पर भटकता रहा। कुछ समय बाद उसने देहरादून में कंपाउंडरी सीखी। यहीं बच्चन जी के साथ उसकी मुलाकात हुई।वह बच्चन जी के साथ इलाहाबाद गया। लेखक ने इलाहाबाद में एम.ए. में एडमीशन लिया पर फीस बच्चन जी द्वारा भरी गई। बोर्डिंग में फ्री सीट, उनकी रचनाओं का प्रकाशन न हो। पाना आदि ऐसी कठिनाइयाँ थीं, जिन्हें उसने अपने जीवन झेला था।

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kritika Chapter 5 किस तरह आख़िरकार मैं हिंदी में आया Download in PDF

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.