NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kritika Chapter – 3 रीढ़ की हड्डी

By | February 10, 2021

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kritika Chapter 3 रीढ़ की हड्डी यहाँ सरल शब्दों में दिया जा रहा है|  NCERT Hindi book for class 9 Kritika Solutions के Chapter 3 रीढ़ की हड्डी को आसानी से समझ में आने के लिए हमने प्रश्नों के उत्तरों को इस प्रकार लिखा है की कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक बात कही जा सके| इस पेज में आपको NCERT solutions for class 9 hindi Kritika

दिया जा रहा है|

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kritika Chapter 3 रीढ़ की हड्डी

प्रश्नअभ्यास

1.रामस्वरूप और गोपाल प्रसाद बातबात पर “एक हमारा जमाना था…….” कह कर अपने समय की तुलना वर्तमान समय से करते हैं। इस प्रकार की तुलना करना कहां तक तर्कसंगत है?

उत्तर:- इस तरह की तुलना करना बिल्कुल तर्कसंगत नहीं होता क्योंकि समय के साथ समाज में, जलवायु में, खान-पान में सब में परिवर्तन होता रहता है। हर समय परिस्थितियां एक सी नही होतीं हैं। हर ज़माने की अपनी स्थितियाँ होती हैं, जमाना बदलता है तो कुछ कमियों के साथ सुधार भी आते हैं।

2. रामस्वरूप का अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलावाना और विवाह के लिए छुपाना, यह विरोधाभास उनकी किस विवशता को उजागर करता है?

उत्तर:- रामस्वरूप लड़कियों को उच्च शिक्षा दिलाने के पक्षधर हैं। उन्होंने उमा को कॉलेज की शिक्षा दिलवाकर बी.ए. पास करवाया। इसके अलावा उमा को संगीत, कला आदि का भी ज्ञान है। रामस्वरूप चाहते हैं कि उमा की शादी अच्छे परिवार में हो। संयोग से परिवार तो उच्च शिक्षित मिला परंतु उसकी सोच अच्छी न थी। लड़के का पिता और स्वयं लड़का दोनों ही चाहते हैं कि उन्हें दसवीं पास लड़की ही चाहिए। एक लड़की का पिता होने के कारण लड़के वालों की इच्छा को ध्यान में रखकर कर्तव्य और वक्तव्य में विरोधाभास रखते हैं। ऐसी परिस्थिति एक विवाह योग्य पुत्री के पिता की विवशता को उजागर करता है।

3. अपनी बेटी का रिश्ता तय करने के लिए रामस्वरूप उमा से जिस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा कर रहे हैं, वह उचित क्यों नहीं है?

उत्तर:- रामस्वरूप चाहता है कि उसकी बेटी उमा उनके सभी सवालों का उत्तर बड़े सहज भाव से दे। वह यह भी चाहता है कि गोपाल प्रसाद के द्वारा पूछे गए बेहूदा प्रश्नों के भी वह चुपचाप उत्तर देती जाए और उनके द्वारा किए गए अपने अपमान को चुपचाप सहन कर ले, क्योंकि वे लड़के वाले हैं। रामस्वरूप का अपनी बेटी से ऐसे व्यवहार की अपेक्षा करना बिल्कुल ग़लत है। आजकल लड़का और लड़की दोनों में किसी प्रकार का कोई भेद नहीं रह गया है। दोनों ही बराबर की शिक्षा के अधिकारी हैं और विवाह के समय केवल लड़की होने के कारण उसे चुपचाप अपमान सहना पड़े, यह उचित नहीं है। लड़का और लड़की बराबर सम्मान के अधिकारी हैं।

4. गोपाल प्रसाद विवाह को ‘बिजनेस’ मानते हैं और रामस्वरूप अपनी बेटी की उच्च शिक्षा छुपाते हैं। क्या आप मानते हैं कि दोनों ही समान रूप से अपराधी हैं? अपने विचार लिखें।

उत्तर:- मेरे विचार से दोनों ही समान रूप से अपराधी है गोपाल प्रसाद विवाह जैसे पवित्र बंधन में भी व्यापार खोज रहे हैं वह इस तरह के आचरण से इस संबंध की मधुरता तथा संबंधों की गरिमा को भी कम कर रहे हैं रामस्वरूप जहां आधुनिक सोच वाले व्यक्ति होने के बावजूद कायरता का परिचय दे रहे हैं वे चाहते तो अपनी बेटी के साथ मजबूती से खड़े होते और एक स्वाभिमानी वर की तलाश करते ना की मजबूरी में आकर परिस्थिति से समझौता करते।

5. “….. आपके लाडले बेटे की रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं…..”उमा इस कथन के माध्यम से शंकर की किन कमियों की ओर संकेत करना चाहती है?

उत्तर:- उमा इस कथन से शंकर की निम्नलिखित कमियों को दर्शाना चाहती है:-

(क). शंकर एक आवारा, चरित्रहीन वह लड़कियों को पीछा करने वाला लड़का था।

(ख). शंकर शारीरिक रूप से भी कमजोर था। वह थोड़ा झुक कर रहता था, जिसकी वजह से यह प्रतीत होता था कि उसकी रीढ़ की हड्डी नहीं है।

(ग). शंकर का स्वयं का कोई मत या निर्णय नहीं था, वह पूरी तरह अपने पिता पर आश्रित था व उनका पालन करता था।

6. शंकर जैसे लड़के या उमा जैसी लड़कीसमाज को कैसे व्यक्तित्व की ज़रूरत है? तर्क सहित उत्तर दीजिए।

उत्तर:- समाज को आज उमा जैसे व्यक्तित्व वाली, शिक्षित, स्पष्टवादिनी, बहादुर, निडर तथा स्वाभिमानी लड़की की ही ज़रूरत है । ऐसी लड़कियाँ ही गोपाल प्रसाद जैसे दिशाभ्रष्ट, दोहरी मानसिकता रखने वाले, डरपोक, लालची और ढोंगी लोगों को सबक सिखा सकती हैं। उमा जैसी लड़कियाँ ही समाज और देश को सच्चाई, सभ्यता और प्रगति के मार्ग दिखला सकती हैं। इसके विपरीत शंकर जैसे व्यक्तित्वहीन, कमज़ोर, परमुखापेक्षी एवं चरित्रहीन लड़के समाज के लिए निरुपयोगी है। ऐसा व्यक्ति समाज को कोई दिशा प्रदान नहीं कर सकता। सच कहा जाय तो शंकर जैसा व्यक्ति समाज के लिए बोझ है, जबकि उमा जैसी लड़की समाज का वर्तमान व आनेवाले पीढ़ियों के लिए एक अच्छी प्रेरणा है।

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7. ‘ शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:- ‘रीढ़ की हड्डी’ एक प्रतीकात्मक तथा व्यंग्यात्मक शीर्षक है जो इस कहानी की भावना को तथा समाज की सड़ी-गली और दोहरी मानसिकता को बिलकुल सही तरीके से व्यक्त करता है एवं उस पर प्रहार  है। इस कहानी के जरिये लेखक समाज में हो रहे लड़कियों की उपेक्षा पर ध्यान आकर्षित करते हुए समाज की कुछ कमज़ोरी, साथ ही नारी-शिक्षा की महत्व और आवश्यकता को बताने की कौशिश किये हैं। समाज को कमज़ोर करते है शंकर जैसा लोग जो शिक्षित नवयुवक होते हुए भी व्यक्तित्वहीन, विचारशक्तिहीन, चरित्रहीन, परजीवी और सारी उम्र दूसरों के इशारों पर ही चलते हैं। यदि शंकर समझदार, साहसी और व्यक्तित्वसंपन्न युवक होता तो गोपाल प्रसाद की इतनी हिम्मत न होती कि वह दो सुशिक्षित वयस्कों के बीच में बैठकर अपनी फूहड़ बातें करे और अशिक्षा को प्रोत्साहन दे। शंकर की कायरता और उसकी असक्षमता कुछ ऐसा था जिसे दर्शाने के लिए उसे बिना रीढ़ की हड्डी के कहा गया है। अगर समाज में शंकर और गोपाल प्रसाद जैसे लोगों का बोल-बाला हो जाय तो ऐसे समाज को भी ‘बिना रीढ़ की हड्डी वाला समाज’ कहा जा सकता है।इस प्रकार ‘रीढ़ की हड्डी’ एक संकेतपूर्ण, जिज्ञासातुर, व्यंग्यात्मक और सफल शीर्षक है।                     

8. कथावस्तु के आधार पर आप किसे एकांकी का मुख्य पात्र मानते हैं और क्यों?

उत्तर:- कथा वस्तु के आधार में उमा मुख्य पात्र है क्योंकि पूरी एकांकी  इसके ही इर्द-गिर्द घूमती है।  भले ही पाठ में उसकी उपस्थिति थोड़े समय के लिए ही है परन्तु उसके विचारों से प्रभावित हुए बिना हम नहीं रह पाते हैं। वह हमें बहुत कुछ सोचने के लिए मजबूर करती है। उसकी उपस्थिति नारी-समाज को एक नई सोच और दिशा प्रदान करती है। समाज की मानसिकता पर व्यंग्य करने का जो प्रयास लेखक ने किया है उसका माध्यम उमा ही है

9. एकांकी के आधार पर रामस्वरूप और गोपाल प्रसाद की चारित्रिक विशेषताएं बताइए।

उत्तर:- रामस्वरूप एक आधुनिक व परिवर्तनशील सोच रखने वाले व्यक्ति हैं, जिन्हें शिक्षा का महत्व पता है और इसीलिए उन्होंने अपनी बेटी का को उच्च शिक्षा दिलाई। लेकिन साथ-ही-साथ, कहीं-न-कहीं वे एक डरपोक व मजबूर पिता भी हैं, जिनको उसके विवाह के लिए झूठ का सहारा लेना पड़ा।

रामगोपाल एक रूढ़िवादी, दकियानूसी, लालची व खोखली सोच वाले व्यक्ति हैं, जिन्हें लगता है कि शिक्षा सिर्फ लड़कों के लिए महत्वपूर्ण है और लड़कियों को शिक्षा दिलाना व्यर्थ है। वे लड़की और लड़की के बीच समानता में विश्वास नहीं रखते और शादी भी उनके लिए एक बिजनेस है, जिससे वे धन अर्जित कर सकते हैं।

10. इस एकांकी का क्या उद्देश्य है? लिखिए।

उत्तर:- प्रस्तुत एकांकी का उद्देश्य है समाज में महिलाओं व लड़कियों को उनके हक के लिए लड़ने व मजबूती से खड़े रहने के लिए प्रेरित करना। इस एकांकी का उद्देश्य समाज में औरतों की दशा को सुधारना व उनको उनके अधिकारों के प्रति जागरूक कराना है। यह एकांकी उन लोगों की तरफ़ अँगुली उठाती है जो समाज में स्त्रियों को जानवरों या सामान से ज़्यादा कुछ नहीं समझते। जिनके लिए वह घर में सजाने से ज़्यादा कुछ नहीं है। यह एकांकी औरत को उसके व्यक्तित्व की रक्षा करने का संदेश देती है और कई सीमा तक इस उद्देश्य में सफल भी होती है| इसमें लड़के और लड़की के बीच होने वाले भेदभाव को गलत बताया गया है और कहा गया है कि शिक्षा लड़के व लड़की दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। लड़कों की इच्छाएं ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि लड़कियों की भी जरूरी होती है। यहां विवाह के समय समाज में लड़कियों को कैसे एक निर्जीव वस्तु की तरह परखा जाता है व उनके साथ कैसा व्यवहार किया जाता है, उसकी ओर इशारा किया गया है।

11. समाज में महिलाओं को उचित गरिमा दिलाने के हेतु आप कौनकौन से प्रयास कर सकते हैं?

उत्तर:- हम निम्नलिखित प्रयासों से समाज में महिलाओं को उचित गरिमा दिला सकते हैं-

1. हम लड़कियों की शिक्षा का महत्व बताकर लोगों को प्रेरित करेंगे।

2.महिलाओं को उचित सम्मान देना चाहिए।

3. हम खुद भी लोगों के लिए प्रेरणा बन सके इसके लिए बहुत मेहनत से पढ़ाई करेंगे।

4. हम सभी स्त्रियों का सम्मान करेंगे और उन्हें कभी भी हीन-दृष्टि से नहीं देखेंगे।

5. हम लड़का वह लड़की को एक समान मानेंगे।

6. हम महिला शिक्षा में अपना योगदान करेंगे

7. अपने समय की महान एवं विदुषी स्त्रियों का उदाहरण समाज में प्रस्तुत करना चाहिए।

8. महिलाओं को अपनी इच्छा अनुसार हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का प्रोत्साहन देना चाहिए।

9. समाज में महिला को समान भागीदारी दिलवाने के लिए प्रयत्न कर सकते हैं।

1०.  लड़कियों का विवाह बिना दहेज लिए व दिए हो इस विषय पर कार्य कर सकते हैं।

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