importance of games in hindi

Importance of Games in Hindi | Khel Kud ka Mahatva

CBSE SYLLABUS

Importance of Games in Hindi में यह बताया गया है कि मनुष्य को मानसिक और शारीरिक दोनों प्रकार से स्वस्थ रहना बहुत ही आवश्यक होता है जिसमें खेल-कूद बहुत अहम भूमिका निभाते हैं. Also Read Ladka Ladki Ek Saman Essay in Hindi.

Importance of Games in Hindi

भूमिका – जीवन स्वयं एक खेल है. यह संसार प्रभु की क्रीडा है. क्रीडा में प्रभु को आनंद मिलता है. यही स्थिति मानव की है. उसके लिए खेल आनंदमय है. सृष्टि के आरंभ से मनुष्य की खेलों के प्रति रुचि स्वाभाविक रूप से रही है.
खेल और शारीरिक विकास – खेल केवल आनंद ही नहीं देते, वे मनुष्य को स्वस्थ भी रखते हैं. खेलों से खिलाड़ियों का शरीर स्वस्थ और मजबूत बनता है. खेलों के द्वारा उनके शरीर में चुस्ती, स्फूर्ती, शक्ति आती है. पसीना निकलने से अंदर के मल बाहर निकल जाते हैं. हड्डियां मजबूत हो जाती हैं. शरीर हल्का फुल्का बन जाता है. पाचन क्रिया तेज हो जाती है.
खेल मनोरंजन के साधन – खेलों का दूसरा लाभ यह है कि ये मन को हम रमाते हैं. खिलाड़ी खेल के मैदान में खेलते हुए शेष दुनिया के तनावों को भूल जाते हैं. उनका ध्यान फुटबॉल, गेंद या खेल में लीन रहता है. संसार के चक्करों को भूलने में उन्हें गहरा आनंद मिलता है.
खेल मानवीय गुण बनाने में सहायक – खेलों की महिमा का वर्णन करते हुए स्वामी विवेकानंद कहा करते थे – ‘मेरे नवयुवक मित्रों ! बलवान बनो. तुमको मेरी यही सलाह है. गीता के अभ्यास की अपेक्षा फुटबॉल खेलने के द्वारा तुम स्वर्ग के अधिक निकट पहुंच जाओगे. तुम्हारी कलाई और भुजाएं अधिक मजबूत होने पर तुम गीता को अधिक अच्छी तरह समझ सकोगे.’ स्पष्ट है कि खेलों से मनुष्य का चरित्र ऊंचा उठता है. स्वस्थ शरीर से स्वस्थ मन और स्वस्थ आत्मा निवास करती है. स्वस्थ व्यक्ति ही दुनिया से अन्याय, शोषण और अधर्म को हटा सकता है.
महापुरुषों के जीवन पर दृष्टि डालें. जिन्होंने समाज में बड़े-बड़े परिवर्तन किए, वे स्वयं बलवान व्यक्ति थे. स्वामी विवेकानंद, दयानंद, रामतीर्थ, महाराणा प्रताप, शिवाजी, भगवान कृष्ण, पुरुषोत्तम राम, युधिष्ठर, अर्जुन सभी शक्तिशाली महापुरुष थे. वे किसी न किसी प्रकार की शारीरिक विद्या में अग्रणी थे. इसी कारण वे यशस्वी बन सके. बीमार व्यक्ति तो स्वयं ही अपने ऊपर बोझ होता है.
खेलों से खेल-भावना आती है. हार-जीत में एक-समान रहना आता है. इसी से आदमी दुख-सुख में एक-समान रहना सीखता है. रोज-रोज हारना और हार को सहजता से झेलना, रोज-रोज जीतना और जीत को सहजता से लेना – ये दोनों गुण खेलो की देन हैं.
उपसंहार – खेल हर प्रकार से लाभकारी हैं, सहज हैं और आनंददायक है. सच तो यह है कि जीवन को खेल समझकर ही जीना चाहिए, कोई गंभीर कार्य समझकर नहीं.