Weathering the Storm in Ersama – Summary in Hindi – Full Text

By | August 14, 2020

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WEATHERING THE STORM IN ERSAMA

 ByHarsh Mander

SUMMARY IN HINDI

27 अक्टूबर, 1999 को प्रशांत अपने एक मित्र को मिलने गया जो एरसामा में रहता था । वह स्थान उसके गाँव से अट्ठारह किलोमीटर दूर था । शाम को एक तीव्र चक्रवात आ गया । हवा बड़े जोर के साथ मकानों से टकराई । तेज और लगातार बरसात हुई । घर और लोग बाढ़ में बह गए । उसके मित्र का घर ईटों और सीमेंट का बना हुआ था । यह इतना मज़बूत था कि 350 मील प्रति घंटा की गति से चलने वाली हवाओं को झेल गया । मगर एक उखडा हुआ वृक्ष उनके घर पर गिर गया और छत के कुछ भाग एवं दीवारों को नुकसान पहुँचाया । घर में बढ़ते हुए पानी से बचने के लिए प्रशांत और उसके मित्र के परिवार ने छत पर आश्रय लिया। वे ठंड एवं बरसात में जम गए । सुबह प्रशांत ने चक्रवात द्धारा किए गए विनाश को देखा । चारों तरफ पानी की चादर थी । केवल सीमेंट वाले मकानों के कुछ भाग नजर आ रहे थे । बाकी सारे घर बह गए थे । यहाँ तक कि बड़े-बड़े वृक्ष भी गिर गए थे । जानवरों और मनुष्यों की फूली हुई लाशें चारों तरफ तैर रही थीं ।

चक्रवात एवं सागर की लहरों द्वारा पैदा किया गया विनाश अगले छत्तीस घंटे तक चला । दो दिन बाद, बरसात बंद हो गई और बरसात का पानी धीरे-घीरे उतरने लगा । प्रशांत को अपने परिवार की चिंता थी । उसने एक लंबी छड़ी ली और अपने गाँव की ओर अट्ठारह किलोमीटर लंबी एवं मुश्किल यात्रा आरंभ कर दी । चारों तरफ पानी था । उसे सड़क को ढूँढने के लिए छडी का प्रयोग करना पड़ता था । कई जगह पानी कमर तक गहरा था और आगे बढ़ना बहुत धीमा था । कई बार सड़क खो जाती थी और उसे तैरना पड़ता था । कुछ दूर जाने के बाद उसे अपने चाचा जी के दो मित्र मिल गए । उन्होंने मिलकर आगे बढ़ने का फैसला किया । उन्हें पानी पर तैरती हुई मानवीय लाशों को परे धकेलना पड़ता था । वहाँ कुत्तों, बकरियों और मवेशियों की लाशें भी थीं । वे जिस भी गाँव से गुजरे, वहाँ मुश्किल से ही कोई घर सलामत नज़र जाता था । उसे डर था कि उसका परिवार उस चक्रवात में जीवित नहीं बचा होगा । आखिर वह अपने गाँव कालीकुदा पहुँचा । उसका दिल डूब गया । उसका घर बह गया था । उसके परिवार का कहीं पता नहीं था । अपने परिवार की तलाश करने के लिए प्रशांत रेडक्रॉस आश्रय में गया । सौभाग्यवश उसका परिवार जीवित था । वे प्रशांत को देखकर बहुत प्रसन्न हुए । उसे पता चला कि गांव के छियासी लोग मर गए थे और सारे के सारे छियानवें घर वह गए थे ।

चक्रवात ने प्रशांत के गाँव एवं आस-पास के गाँवों में बहुत विनाश किया । प्रशांत ने अपने परिवार एवं अन्य लोगों की सहायता करने का निर्णय लिया । उसने जवानों का एक समूह संगठित किया । उन्होंने स्थानीय व्यापारी पर दबाव डाला कि वह भूख से मरते ग्रामीणों को चावल दे । उन्होंने आग जलाईं और चावल पकाया, यद्यपि यह सड़ रहा था । उसका अगला कदम था कि उस स्थान से गंदगी, कूड़ा, पेशाब और तैरती हुई लाशें हटाई जाएं । जो बहुत से लोग घायल हो गए थे, उन्होंने उनके जख्मों और टूटे अंगों की देखभाल की । पाँचवें दिन, मिलिट्री के एक हेलीकॉप्टर ने भोजन गिराया । मगर यह लौटकर नहीं आया । प्रशांत एवं अन्य लोगों ने हैलीकॉप्टर का ध्यान अपनी और आकर्षित करने के लिए एक योजना बनाई । उन्होंने बच्चों को कहा कि वे अपने पेट पर खाली बर्तन रखकर लेट जाएँ । ऐसा इसलिए किया गया कि वे हेलीकाप्टरों को बताएं कि वे भूखे हैं । यह योजना काम कर गई और उसके बाद हैलिकोप्टर ने नियमित रुप से भोजन गिराना आरंभ किया ।

प्रशांत अनाथ बच्चों को लाया और उनके लिए एक आश्रय बनाया । उसने स्त्रियाँ को कहा कि वे उनकी देखभाल करें । मगर उसने देखा कि स्त्रियाँ और बच्चे गम में और गहरे डूबते जा रहे थे । एक गैर –सरकारी संस्था ने काम के बदले अनाज योजना आरंभ की । प्रशांत ने उन्हें मनाया कि  वे इस योजना में शामिल हों । उसने अन्य स्वयं सेवकों को इस काम पर लगाया कि वे विधवाओं की अपना जीवन फिर से आरंभ करने में सहायता करे । अनाथ बच्चों को अपने ही समुदाय में फिर से बसाया गया ।

यधपि उस बात को छ: महीने बीत गए है जब चक्रवात ने भारी विनाश किया था ,मगर गाँव की विधवाएँ एवं बच्चे अपने दुःख एवं आवश्यकता के समय में अभी भी प्रशांत की तलाश करते हैं ।

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