The Address- Summary in Hindi – Full Text

By | October 7, 2021
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            The Address

                                                           By- Marga Minco

Summary in Hindi/ The Address

Summary in Hindi

हालैण्ड आजादी की जंग लड़ रहा था I लेखिका सेना में भर्ती हो गई थी I युद्ध लम्बा तथा भीषण था I सफलता जैसे दूर की कौड़ी-सी दिख रही थी I लोगों को शक था कि कोई भी सैनिक युद्ध से जीवित लौटेगा I

घर पर लेखिका की माँ ही थी I उसे अपनी चीजों की सुरक्षा की चिन्ता सता रही थी I उसके पास ढेर-से चाँदी के छुरी-काँटे तथा बहुमूल्य पुरानी चीजें थी I एक दिन उसकी एक पुरानी सहेली अप्रत्याशित रूप से आ गई I उसका नाम था Mrs. Dorling I Mrs.S’s का विश्वास जीत लिया I उसने सुझाव दिया कि Mrs.S’s की चीज़ों को अपने घर सुरक्षा हेतु ले जाए I लेखिका की माँ ने उसकी इस पेशकश को सधन्यवाद स्वीकार कर लिया I

लेखिका युद्ध के प्रथम आधे समय में कुछ दिनों के लिए घर आई थी I उसने कमरे में कुछ परिवर्तन देखा I उसे कुछेक वस्तुएँ वहाँ से गायब दिखी I उसने माँ को हैरान कर दिया I तभी माँ ने उसे Mrs.Dorling के बारे में बताया जो उसके  चाँदी के छुरी-काँटे, पात्र, पुरानी प्लेटें तथा कप-प्याले कृपा करके अपने घर ले गई थी Mrs.Dorling ने वचन दिया था कि वह सभी चीजें सुरक्षित रखेगी I पर Mrs.S’s ने उससे यह वचन नहीं लिया था कि वह सभी चीज़ों को कभी लौटा देगी I अगली प्रातः Mrs. Dorling पुनः आ गई I  चौड़ी पीठ वाली महिला एक भारी सूटकेस जिसमें अनेक चीजें भरी थी, लिए जा रही थी I माँ ने लेखिका का परिचय Mrs.Dorling से करा दिया I पहली बार में कितने Mrs.Dorling को देखा था जो मार्कोनी स्ट्रीट में, घर नं. 46 में रहती थी I माँ ने बेटी को बोला कि इस पते को याद रखना I और एक अरसे तक लेखिका उस पते को याद रखे रही I
आजादी की लड़ाई समाप्त हो गई, लेखिका अपने शहर वापिस लौट आई I
धीरे-धीरे सब कुछ सामान्य होने लगा I माँ अब जीवित नहीं थी I लेखिका अकेले ही एक कमरे में रह रही थी  I उसमें इतनी जगह न थी कि सारी चीजें वापस लेकर कमरे में सजा ले I फिर भी उसकी इच्छा हुई कि एक बार तो उन चीजों को देख ले, स्पर्श कर ले I इसलिए वह रेलगाड़ी से मार्कोनी स्ट्रीट गई और वहाँ उसने 46 नं.  घर की घंटी बजाई I एक महिला ने दरवाजा आधा खोल कर देखा I उस दरार से उसने आगन्तुक को पहचाना I वह Mrs.Dorling ही थी I जिसने इस लड़की के युद्ध से जीवित लौट आने की कोई उम्मीद नहीं थी I उसने लेखिका को पहचानने से इंकार कर दिया I लेखिका को एक क्षण ऐसा लगा कि कहीं वह गलत पते पर तो नहीं आ गई थी I और उसका संदेह दूर हो गया जब उसने Mrs.Dorling को अपनी माँ का हरा कार्डिगन पहने देखा I

तो वह सही पते पर ही आई थी I Mrs.Dorling पूछ बैठी कि तुम युद्ध से जीवित किस प्रकार लौट आई I उसने लेखिका को घर के अंदर नहीं बुलाया I उसने दरवाजा बंद कर दिया I लेखिका ने नाम पट्टिका पर पुनः दृष्टि डाली I उस पर लिखा था Dorling नं.46 I वह वापिस स्टेशन आ गई तथा स्मृतियों में खो गई I उसकी Mrs . Dorling के घर पर पहली मुलाकात तो निष्फल हो गई थी, पर उसने हार नहीं मानी I उसने दोबारा प्रयास करने का निर्णय ले लिया I

इस बार Mrs.Dorling की 15 वर्षीय बेटी ने दरवाजा खोला I Mrs.Dorling घर पर नहीं थी I लेखिका ने घर बैठकर प्रतीक्षा करने का विचार किया I लड़की के पीछे-पीछे वह गलियारे में चल पड़ी I उसने अपना एक मोमबत्ती स्टैंड दर्पण के निकट रखा देखा I वह बैठक में पहुँच गई I उसे चारों ओर अपनी वही चीजें दिखाई दी जिन्हें वह देखना चाहती थी I पर उसे यह देखकर पीड़ा हुई कि उन चीजों को फूहड़ढंग से रखा गया था I फर्नीचर टूटा-फूटा था तथा उसमें सीलन की बू आ रही थी वह एक मेज़ पर बैठ गई तथा देखा कि मेज़पोश उसका अपना ही था I  उसके किनारे पर जलने का एक दाग बना हुआ था जिसकी मरम्मत माँ ने नहीं की थी I

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लड़की ने बताया कि माँ आने वाली वाली है तथा उसने उन्हीं के लिए चाय बना रखी है I लड़की ने लेखिका को एक  चाय का प्याला थमाया I उसने एक डिब्बा खोला तथा कुछ चम्मच निकाले I यह सभी चीजें उसकी माँ की ही संपदा थी I उसने महसूस किया कि व्यक्ति रोजमर्रा इस्तेमाल की जाने वाली चीजों का इतना आदी हो जाता है कि उनको ध्यान से नहीं देख पाता I Mrs.Dorling की बेटी ने भी कभी यह महसूस नहीं किया कि उसके छुरी-काँटे चाँदी के है I उसने एक दराज खोली ताकि चम्मच और काँटे निकाले I पर लेखिका उन्हें देखने के लिए ठहरी नहीं I वह Mrs.Dorling से मिलना नहीं चाहती थी I इसलिए वह अपनी गाड़ी पकड़ने के लिए चल दी I

सड़क पर कोने पर पहुँच कर उसने नाम पर पट्टिका पर पुनः नजर डाली I वह गई तो सही पते पर थी I पर अब याद रखने की कोई जरूरत नहीं थी I  वह वहाँ पुनः आने वाली नहीं थी I अपनी चीजों में उसकी
रूचि खत्म हो गई थी जिन्हें उसके घर से ले जाया गया था तथा नई जगह पर सजा दिया गया था I इसके अलावा उसे अब इन चीजों की अपनी छोटे किराए के कमरे में जरूरत भी न थी I उसकी संकरी मेज के  दराज में गिनती के छुरी-काँटे रखे जा सकते थे I इसलिए उसने निश्चय कर लिया कि Mrs.Dorling के घर के पते

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को वे सदा के लिए भुला देगी और ऐसा कर पाना अब बिल्कुल सरल काम था I