Ranga’s Marriage- Summary in Hindi – Full Text

By | October 7, 2021
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 Ranga’s Marriage

By- Maasthi Venkatesa Iyengar

Summary in Hindi/ Ranga’s Marriage

Summary in Hindi

लेखक का नाम है श्यामा I वह स्वयं स्वीकारता है कि वह खली के काले पड़े ढेले की भाँति है I वह होसाहल्ली गाँव में रहता है I उसे इस बात का खेद है कि उसके गाँव का वर्णन किसी भी भूगोल की पुस्तक में नहीं है न ही उसे एटलस में कहीं दिखाया गया है I पर उसकी राय में उसका गाँव कई दृष्टि से अनूठा है I वहाँ आम के वृक्ष हैं तथा गाँव की ताल में एक बेल है I उस गाँव के बारे में जानकारी पाने का सर्वोत्तम तरीका है कि वहाँ जाकर देखा जाए I
श्यामा अब वह कहानी सुनाता है जो दस वर्ष पूर्व घटी थी I उन दिनों अंग्रेजी जानने वाले लोगों की संख्या बहुत कम थी I इसलिए जब गाँव के लेखाकार ने अपने बेटे रंगप्पा को बैंगलोर पढ़ने के लिए भेजा तो वह एक समाचार बन गया I स्वभाविक रूप से उसके छह माह पश्चात घर लौटना भी एक बड़ी घटना बन गई I यह समाचार जंगल में आग की भाँति फैल गया I सभी गाँववासी उस लड़के के घर उसे देखने पहुँच गए I श्यामा भी उस जनसमूह में शामिल था I पर सभी लोगों को निराशा हुई I उन्हें रंगा में कोई परिवर्तन नहीं देखा I  एक वृद्धा ने तो रंगा की छाती पर हाथ फेरा तथा उसे यह जानकर खुशी हुई कि बालक अभी भी जनेऊ धारण किए हुए है I
भीड़ धीरे-धीरे छट गई I श्यामा ने रंगा से बात की, रंगा ने उन्हें सादर नमस्कार किया तथा उसके चरण स्पर्श भी किए I उसे आशीर्वाद ही मिल गया कि तुम्हारा विवाह शीघ्र ही संपन्न हो जाए I
उसी शाम रंगा श्यामा के घर दो संतरे लेकर पहुँच गया I श्यामा को लगा कि ऐसे उदार हृदय व्यक्ति का विवाह शीघ्र हो जाना चाहिए I वह घर बसा ले और समाज की सेवा करे I उन्होंने रंगप्पा से पूछा कि तुमने कब विवाह करने का विचार किया है I पर रंगा ने दो टूक जवाब दिया कि जब तक उसकी पसंद की लड़की नहीं
मिलती वह विवाह नहीं करेगा I उसके विवाह के बारे में कुछ कठोर विचार थे I उसके अनुसार किसी भी छोटी आयु की अधिपक्व बुद्धि वाली लड़की से विवाह करना मूर्खता है I दूसरी बात, व्यक्ति को उसी लड़की से विवाह करना चाहिए जो उसे पसंद हो I वह माता-पिता द्वारा संयोजित विवाह नहीं करना चाहता था I श्यामा उदास से हो गए I फिर भी उन्होंने ठान लिया कि वे रंगा के लिए कोई लड़की शीघ्र ही खोज लेंगे I और उन्हें उसे खोजने के लिए प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ी I रामाराव की भतीजी, ग्यारह वर्षीय सुन्दर लड़की, किसी बड़े नगर से गाँव में रहने आ गई थी I वह हारमोनियम बजाने तथा मधुरस्वर में गाने में निपुण थी I उसके माता-पिता स्वर्ग सिधार चुके थे I लेखक ने सोचा कि यही लड़की रंगा के लिए सर्वत्र उपयुक्त रहेगी उस लड़की का नाम था रत्ना I

अगली सुबह ही लेखक ने रत्ना को तथा रंगा को अपने घर पर बुला लिया I रत्ना साड़ी पहने थी तथा गाना गा रही थी I रंगा भी तभी आ गया I दरवाजे पर खड़े होकर उसने अन्दर झाँका I रत्ना ने किसी अजनबी को देखकर गायन छोड़ दिया I रंगा को निराशा हुई I उसने लड़की पर बार-बार दृष्टि डाली; रत्ना शरमाकर अंदर भाग गई I फिर रंगा ने उस लड़की के बारे में पूछा कि वह विवाहित है अथवा कुँवारी I श्यामा ने झूठ बोला कि रत्ना का विवाह तो एक वर्ष पूर्व ही हो चुका था I रंगा का चेहरा ऐसे सिकुड़ गया जैसे भुना हुआ बैंगन सिकुड़ जाता है I

श्यामा अगली प्रातः शास्त्री के पास गए I उन्होंने उसे सिखा-पढ़ा दिया कि रंगा से उन्हें क्या कहना है I उसी शाम श्यामा रंगा से मिले जो विचारों में खोया हुआ था I पर दोनों ही शास्त्री के घर पहुँच गए; शास्त्री रंगा को देखकर प्रसन्न हो गए I पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शास्त्री ने ज्योतिष की पुस्तकें निकाली तथा कुछ गणना की I फिर उन्होंने बताया कि रंगा किसी लड़की के बारे में सोच रहा है I उस लड़की का नाम समुद्र में पाई जाने वाली किसी वस्तु के आधार पर है I सभी सहमत हो गए कि रत्ना ही रंगा के लिए उपयुक्त लड़की है पर रंगा की खुशी काफूर हो गई जब श्यामा ने दोहराया कि रत्ना का तो विवाह हो चुका है I

वे दोनों साथ-साथ वापिस चल दिए I रास्ते में श्यामा रत्ना के घर के अन्दर गए I वह रंगा के लिए एक सुखद समाचार लाए कि लड़की अभी कुँवारी है और बिना विलम्ब के रंगा का रत्ना से विवाह हो गया I

अनेक वर्ष बीत गए I एक दिन रंगा श्यामा के घर पर उन्हें भोजन का निमन्त्रण देने गया I अवसर था उसके तीन वर्षीय बेटे का जन्मदिन I उन्होंने बच्चे का नाम भी श्यामा रखा था I इस प्रकार से उन्होंने अपना विवाह कराने वाले के प्रति अपना आदर मान दिखाया I श्यामा रंगा के घर भोजन के लिए गए I जन्मदिन उपहार के रूप में उन्होंने बच्चे की छोटी अंगुली में एक सोने की अंगूठी पहना दी I

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