In the Kingdom of Fools- Summary in Hindi – Full Text

By | August 14, 2020

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In The Kingdom of Fools

By- A.K. Ramanujan’s

Summary in Hindi/In The Kingdom of Fools

एक समय में मूर्खों का एक राज्य था । राज्य में राजा और मंत्री दोनों मूर्ख थे ।  वे दूसरे राजाओं से भिन्न तरीके से शासन करना चाहते थे । उन्होंने आदेश दिया कि रात को सभी लोगों को जाग कर काम करना है; जैसे ही सूर्योदय होगा, सभी को सो जाना है । जिस किसी ने आज्ञा का उल्लंघन किया उसे मृत्युदंड मिलना था । एक दिन एक गुरु और उसका शिष्य शहर में पहुँचे । भरी दोपहरी थी और हर कोई सोया हुआ था । जैसे ही सूर्यास्त हुआ , पूरा नगर जाग उठा और अपने काम पर लग गया । दोनों व्यक्ति भूखे थे । वे कुछ किराने का सामान खरीदने गए । उन्होंने देखा कि हर चीज का एक ही दाम था – एक डड्डू । जब वे खाना पका कर खा चुके तो गुरु को एहसास हुआ कि मूर्खो के एक राज्य में ठहरना बुद्धिमानी नहीं होगी । किन्तु शिष्य वह स्थान छोड़ कर जाना नहीं चाहता था क्योंकि वहां हर चीज़ सस्ती थी । इसलिए गुरु वहाँ से चला गया और शिष्य वहीं ठहर गया । वह हर दिन भर पेट खाने लगा और मोटा हो गया ।

एक दिन एक चोर दीवार में सेंध लगा कर एक धनी व्यापारी के घर के अन्दर घुस गया । जैसे को वह अपनी लूट का सामान लेकर बाहर जा रहा था, मकान की दीवार उसके सिर पर गिर गई और वह उसी समय मर गया । चोर का भाई दौड़ता हुआ राजा के पास गया और उसने शिकायत की कि एक मज़बूत दीवार नहीं बनाने के अपराध से व्यापारी को दंड मिलना चाहिए । राजा ने व्यापारी को बुला भेजा । किन्तु व्यापारी ने विनती की कि वास्तव यह उस  व्यक्ति का दोष था जिसने दीवार बनाई थी । राजमिस्त्री को लाया गया । उसने कहा कि जब वह दीवार बना रहा था तो उसका ध्यान एक नर्तकी पर चला गया था । वह पूरा दिन अपनी पायल बजाती हुई उस सड़क पर आती- जाती रही थी । उस नर्तकी को दरबार में लाया गया । उसने अपनी तरफ से सफाई पेश की कि उसने सोनार को अपने लिए कुछ आभूषण बनाने के लिए कुछ सोना दिया हुआ था । सोनार एक आलसी व्यक्ति था । उसने काम को करने में देर लगाई । उसने दर्जनों बार उससे अपने घर के चक्कर लगवाए । जब सोनार को राजा के सामने लाया गया तो उसने कहा कि उसे पहले एक धनी व्यापारी का काम करना था । उस व्यापारी के घर में विवाह था और वह प्रतीक्षा करने को तैयार नहीं था उसी कारण से उसने  नर्तकी से इतनी बार अपने घर के चक्कर लगवाए । राजा ने उससे उस धनी व्यापारी का नाम पूछा । वह धनी व्यापारी और कोई नहीं , वही था जिसकी दीवार गिर गई थी । किन्तु व्यापारी चिल्लाया कि उसने नहीं बल्कि उसके मृत पिता ने आभूषण बनाने का काम सोनार को दिया था । राजा ने कहा कि अपने पिता की जगह पर उसे दंड मिलना वाजिब था ।

प्राणदंड के लिए एक नई सूली बनाकर तैयार रखने का आदेश दिया गया । मंत्री को यह विचार आया कि सूली पर सही तरीके से भर डालने के लिए वह धनी व्यापारी बहूत पतला था । उसने इस बारे में राजा से बात –चीत की । यह निर्णय लिया गया कि सूली पर चढ़ाने के लिए किसी उपयुक्त मोटे व्यक्ति को ढूंढा जाए । नौकरों  की नज़र उस शिष्य पर पड़ गई जो महीनों से केले, चावल, गेहूँ और घी खा-खा कर मोटा हो गया था । उसे

राजा के पास ले जाया गया ।  शिष्य ने विनती की वह निर्दोष था किन्तु सब व्यर्थ गया।

जिस दौरान वह अपनी मृत्यु की प्रतीक्षा कर रहा था उसने गुरु को याद किया । गुरु ने अपनी जादुई शक्ति से सब कुछ देख लिया । वह अपने शिष्य को बचाने के लिए तुरन्त वहाँ पहुँच गया ।  उसने अपने शिष्य के कान में कुछ कहा ।  फिर उसने राजा से निवेदन किया कि पहले उसे सूली पर चढ़ाया जाए ।  जब शिष्य ने यह सुना तो उसने कहा कि उसे वहाँ पहले लाया गया था और इसलिए पहले उसे मृत्युदंड मिलना चाहिए ।  राजा उनके व्यवहार से चक्कर में पड़ गया । उसने पूछा कि उनमें से प्रत्येक पहले क्यों मरना चाहता था ।  गुरु ने हिचकिचाते हुए उत्तर दिया कि जो पहले सूली पर चढ़ेगा वह आपले जन्म में पैदा होकर उस देश का राजा बनेगा ।  जो उसके बाद मरेगा वह उस देश का भावी मंत्री बनेगा ।  

राजा दूसरे जन्म में अपना राज्य किसी दूसरे के हाथ में नहीं खोना चाहता था ।  उसने और उसके मंत्री ने निर्णय लिया कि वे स्वयं सूली पर चढ़ जाएँगे और राजा और मंत्री के रूप में फिर से जन्म लेंगें ।  राजा ने जल्लादों से कहा कि उनके पास जो पहला व्यक्ति आएगा उसे पहले मार डालना है और फिर वैसा ही दूसरे आने वाले व्यक्ति के साथ करना है ।   उस रात राजा और उसका मंत्री चुपके से कैदखाने में गए और उन्होंने गुरु और शिष्य को आज़ाद कर दिया । फिर उन्होंने उन दोनों का वेश धारण किया और स्वयं को मौत के घाट उतरवा लिया ।  लोगों ने अब गुरु और शिष्य को उनका राजा और मन्त्री बनने के लिए याचना की । दोनों मान गए और उन्होंने सभी पुराने कानूनों को बदल दिया ।  उस दिन के बाद से रात को रात रहना था और दिन को दिन । इसके अतिरिक्त एक डड्डू में कुछ भी नहीं मिलना था ।  वह जगह किसी भी अन्य जगह की तरह बन गई ।

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