NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter – 7 धर्म की आड़

By | February 9, 2021

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitiz Chapter 7 धर्म की आड़ यहाँ सरल शब्दों में दिया जा रहा है|  NCERT Hindi book for class 9 Sparsh Solutions के Chapter 7 धर्म की आड़को आसानी से समझ में आने के लिए हमने प्रश्नों के उत्तरों को इस प्रकार लिखा है की कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक बात कही जा सके| इस पेज में आपको NCERT solutions for class 9 hindi Sparsh

दिया जा रहा है|

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter 7 धर्म की आड़

अभ्यास प्रश्न

मौखिक

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एकदो पंक्तियों में दीजिए

1.आज धर्म के नाम पर क्याक्या हो रहा है?

उत्तर:- आज धर्म के नाम पर उत्पात, ज़िद, दंगे-फ़साद हो रहे हैं।

2. धर्म के व्यापार को रोकने के लिए क्या उद्योग होने चाहिए?

उत्तर:- धर्म के व्यापार को रोकने के लिए, साहस और दृढ़ता के साथ उद्योग होना चाहिए।

3. लेखक के अनुसार स्वाधीनता आंदोलन का कौनसा दिन बुरा था?

उत्तर:- लेखक के अनुसार स्वाधीनता आंदोलन का वह दिन सबसे बुरा था जिस दिन स्वाधीनता के क्षेत्र में खिलाफत, मुल्ला मौलवियों और धर्माचार्यों को स्थान दिया जाना आवश्यक समझा गया। इसके कारण मौलाना अब्दुल बारी और शंकराचार्य देश के सामने शक्तिशाली धार्मिक नेताओं के रूप में स्थापित हुए और राजनीति में धर्म का प्रवेश हो गया। 

4. साधारण से साधारण आदमी तक के दिल में क्या बात अच्छी तरह घर कर बैठी है?

उत्तर:- साधारण से साधारण आदमी तक के दिल में यह बात अच्छी तरह बैठी हुई है कि धर्म और ईमान की रक्षा के लिए प्राण तक देना वाजिब है।

5. धर्म के स्पष्ट चिह्न क्या हैं?

उत्तर:- शुद्धाचरण और सदाचार की धर्म के स्पष्ट चिन्ह है।

लिखित

() निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए

1.चलतेपुरज़े लोग धर्म के नाम पर क्या करते हैं?

उत्तर:- चलते-पुरज़े लोग धर्म के तत्वों को नहीं समझने वाले लोगों को धर्म के नाम पर मूर्ख बनाकर अपना स्वार्थ-सि़द्ध करते हैं, उनकी शक्तियों और उनके उत्साह का अपने लाभ के लिए दुरुपयोग करते हैं एवं  अपना नेतृत्व और बड़प्पन कायम रखते हैं। वे धर्म और ईमान की बुराइयों से अपना काम सुगमता से निकालने में लगे रहते हैं।

2. चालाक लोग साधारण आदमी की किस अवस्था का लाभ उठाते हैं?

उत्तर:- चालाक लोग साधारण आदमी की धर्म की रक्षा के लिए जान लेने और देने वाले विचार और अज्ञानता का लाभ उठाते हैं। पहले वे अपना प्रभुत्व स्थापित करते हैं| उसके बाद स्वार्थ सिद्धि के लिए जिधर चाहे मोड़ देते हैं।

3. आनेवाला समय किस प्रकार के धर्म को नहीं टिकने देगा?

उत्तर:- अजां देना, शंख बजाना, नाक दबाना और नमाज पढ़ना धर्म नहीं है; बल्कि शुद्धाचरण और सदाचार रखना ही असली धर्म है। चालाक और धूर्त लोग ईश्वर को रिश्वत देकर, किसी को भी तकलीफ देकर व उनकी आस्था का गलत उपयोग करके अपना काम निकलवाने के लिए स्वयं को मुक्त समझते है। आने वाला समय किस प्रकार के धर्म को नहीं टिकने देगा।

4. कौनसा कार्य देश की स्वाधीनता के विरूद्ध समझा जाएगा?

उत्तर:- देश में प्रत्येक व्यक्ति अपने मन और श्रद्धा के अनुसार धर्म को मानने के लिए आजाद होना चाहिए। यदि कोई किसी धर्म को माननेवाला दूसरे के धर्म में ज़बरदस्ती हस्तक्षेप (दखलंदाजी) करता है तो उसका यह कार्य देश की स्वाधीनता के विरुद्ध समझा जाएगा।।

5. पाश्चात्य देशों में धनी और निर्धन लोगों में क्या अंतर है?

उत्तर:- पाश्चात्य देशों में धनी और निर्धन लोगों के बीच एक गहरी खाई है। गरीबों की  कमाई से वे और अमीर बनते जा रहे हैं और उसी के बल से यह प्रयत्न करते हैं कि गरीबों का और शोषण हो| वे गरीबों को धन दिखाकर अपने वश में करते हैं और फिर मनमाना धन अर्जित करने के लिए जोत देते हैं।

6. कौनसे लोग धार्मिक लोगों से अधिक अच्छे हैं?

उत्तर:- जिन लोगों का आचरण अच्छा है, जो दूसरों का कल्याण करते हैं, अपने आचरण से दूसरों को दुख नहीं पहुंचाते हैं तथा जो अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए भोले-भाले लोगों का शोषण नहीं करते हैं, वे धार्मिक लोगों से अधिक अच्छे हैं।

() निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए

1.धर्म और ईमान के नाम पर किए जाने वाले भीषण व्यापार को कैसे रोका जा सकता है?

उत्तर:-धर्म और ईमान के नाम पर किए जाने वाले भीषण व्यापार को रोकने के लिए साहस और दृढ़ता के साथ उद्योग (परिश्रमपूर्ण प्रयत्न) होना चाहिए। किसी धर्म की उपासना के मार्ग में कोई भी रुकावट नहीं होनी चाहिए। देश में प्रत्येक व्यक्ति अपने मन और श्रद्धा के अनुसार धर्म को मानने के लिए आजाद होना चाहिए। धर्म, किसी दशा में भी किसी दूसरे व्यक्ति की स्वाधीनता को छीनने या कुचलने का साधन नहीं होना चाहिए।  दो भिन्न धर्मो के मानने वालों के टकरा जाने के लिए कोई भी स्थान नहीं होना चाहिए। यदि कोई किसी धर्म को माननेवाला दूसरे के धर्म में ज़बरदस्ती हस्तक्षेप (दखलंदाजी) करता है तो उसका यह कार्य देश की स्वाधीनता के विरुद्ध समझा जाना चाहिए। 

2. ‘बुद्धि पर मार’ के संबंध में लेखक के क्या विचार हैं?

उत्तर:-बुद्धि पर मार’ से लेखक कहना चाह रहा है कि चालाक लोग गरीब, अज्ञानी, अंधविश्वासी, व मूर्ख लोगों की बुद्धि पर पर्दा डालकर पहले ईश्वर और आत्मा का स्थान अपने लिए ले लेते है और फिर धर्म, ईमान, ईश्वर व आत्मा के नाम पर अपनी स्वार्थसिद्धि के लिए लोगों को लड़ाते-भिड़ाते है। वे मूर्ख लोगों की शक्तियों और उत्साह का उपयोग करके अपना स्वार्थ सीधा करते है।

3. लेखक की दृष्टि में धर्म की भावना कैसी होनी चाहिए?

उत्तर:- लेखक की दृष्टि में धर्म किसी दूसरे व्यक्ति की स्वाधीनता को छीनने का साधन न बने। जिसका मन जो धर्म चाहे वो माने और दूसरे का जो चाहे वो माने। दो भिन्न धर्मों को मानने वालों के लिए मतभेद की गुंजाइश न हो| अगर कोई व्यक्ति दूसरे के धर्म में दखल दे तो इस कार्य को  स्वाधीनता के विरुद्ध समझा जाए।

4. महात्मा गाँधी के धर्मसंबंधी विचारों पर प्रकाश डालिए।

उत्तर:- गाँधीजी धार्मिक कट्टरता के विरोधी थे। वे अपने जीवन में धर्म को महत्वपूर्ण स्थान देते थे। वे सर्वत्र धर्म का पालन करते थे। धर्म के बिना एक पग भी चलने को तैयार नहीं होते थे। धर्म से महात्मा गाँधी का मतलब ऐसे धर्म से था जो ऊँचे और उदार तत्वों का ही हुआ करता है। उनका धर्म स्वार्थ साधना से दूर लोक-कल्याण के लिए हुआ करता था।  प्रत्येक व्यक्ति का यह कर्त्तव्य है कि वह धर्म के स्वरूप को भलि-भाँति समझ ले।

5. सबके कल्याण हेतु अपने आचरण को सुधारना क्यों आवश्यक है?

उत्तर:- सबके कल्याण हेतु अपने आचरण को सुधारना इसलिए आवश्यक है क्योंकि जब हम खुद को ही नहीं सुधारेंगे, दूसरों के साथ अपना व्यवहार सही नहीं रख सकेंगे। दिन भर के नमाज़, रोज़े और गायत्री किसी व्यक्ति को अन्य व्यक्ति की स्वाधीनता रौंदने और उत्पात फैलाने के लिए आज़ाद नहीं छोड़ सकेगा।

() निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए

1.उबल पड़ने वाले साधारण आदमी का इसमें केवल इतना ही दोष है कि वह कुछ भी नहीं समझताबूझता, और दूसरे लोग उसे जिधर जोत देते हैं, उधर जुत जाता है।

उत्तर:- बहुत से ऐसे लोग जो अज्ञानी है, जिन्हें धर्म का असली अर्थ भी नहीं पता, उन्हें धर्म के नाम पर उकसाना बहुत ही आसान होता है। जहां धर्म की बात आती है, वहां वे अपनी बुद्धि का भी प्रयोग नहीं करते और स्वार्थी व चालाक लोग उन्हें जिधर मोड़ते है, वे बिना सोचे-समझे उधर मुड़ जाते है; क्योंकि उन्हें धर्म और ईमान के नाम पर जान लेना और देना बिल्कुल वाजिब लगता है।

2. यहाँ है बुद्धि पर परदा डालकर पहले ईश्वर और आत्मा का स्थान अपने लिए लेना, और फिर धर्म, ईमान, ईश्वर और आत्मा के नाम पर अपनी स्वार्थसिद्धि के लिए लोगों को लड़ानाभिड़ाना।

उत्तर:- भारत में धार्मिक नेता लोगों की बुद्धि का शोषण करते हैं। पहले वे अपने प्रति अंध श्रद्धा उत्पन्न करते हैं। लोग उन्हें ईश्वर, आत्मा और धर्म का पूज्य प्रतीक मान बैठते हैं। जब लोगों की श्रद्धा उन पर जम जाती है तो वे ईमान, धर्म, ईश्वर या आत्मा का नाम लेकर उन्हें दूसरे धर्म वालों से लड़ाते-भिड़ाते हैं तथा अपने स्वार्थ सिद्ध करते हैं।3. अब तो, आपका पूजा-पाठ न देखा जाएगा, आपकी भलमनसाहत की कसौटी केवल आपका आचरण होगी।

3.अब तो, आपका पूजा-पाठ न देखा जाएगा, आपकी भलमनसाहत की कसौटी केवल आपका आचरण होगी।

उत्तर:- बहुत से चालाक लोग सुबह-शाम ईश्वर की पूजा-अर्चना कर व ईश्वर को इस प्रकार की रिश्वत देकर ये समझते है कि बाकि पूरे दिन वे किसी को भी तकलीफ देकर अपना स्वार्थ पूरा कर सकते है। लेकिन ऐसा नहीं है, अब उनका वह पूजा-पाठ उन्हें भले-मानुष की उपाधि नहीं देगा।

4. तुम्हारे मानने ही से मेरा ईश्वरत्व कायम नहीं रहेगा, दया करके, मनुष्यत्व को मानो, पशु बनना छोड़ो और आदमी बनो !

उत्तर:- लेखक का मत है कि ईश्वर का अस्तित्व किसी के मानने या नहीं मानने पर निर्भर नहीं है। इसलिए ईश्वर के नाम पर ये दिखावा, पाखंड, झूठ और फरेब़ बन्द करना चाहिए। ईश्वर भी यही विचार प्रत्येक मनुष्य को समझाना चाहेगा कि मनुष्य जीवन लिया है तो प्रत्येक मनुष्य के प्रति प्रेम और सहयोग की भावना होनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं है तो वह जानवरों जैसा असभ्य व्यवहार है और ऐसा व्यवहार करना छोड़ देना चाहिए।।

इस पेज में आपको NCERT solutions for class 9 hindi Sparsh दिया जा रहा है| हिंदी स्पर्श के दो भाग हैं | Hindi Sparsh स्पर्श भाग 1 सीबीएसई बोर्ड द्वारा class 9th के लिए निर्धारित किया गया है | इस पेज की खासियत ये है कि आप यहाँ पर ncert solutions for class 9 hindi Sparsh pdf download भी कर सकते हैं| we expect that the given class 9 hindi Sparsh solution will be immensely useful to you.

भाषाअध्ययन

1.उदाहरण के अनुसार शब्दों के विपरीतार्थक लिखिए

सुगम – दुर्गम

धर्म, साधारण, स्वार्थ, दुरूपयोग, नियंत्रित, स्वाधीनता

उत्तर:- धर्म – अधर्म

साधारण – असाधारण

स्वार्थ – निस्वार्थ

दुरूपयोग – सदुपयोग

नियंत्रित – अनियंत्रित

स्वाधीनता – पराधीनता

2. निम्नलिखित उपसर्गों का प्रयोग करके दोदो शब्द बनाइए

ला, बिला, बे, बद, ना, खुश, हर, गैर

उत्तर:- ला – लाइलाज, लाजवाब।

बिला – बिलाशक, बिला-वजह

बे – बेजुबान, बेस्वाद।

बद – बदकिस्मत, बदलाव।

ना – नामंजूर, नालायक।

खुश – खुशनसीब, खुशकिस्मत।

हर – हरदम, हर-एक

गैर – गैर-मौजूदगी, गैर-जिम्मेदार।

3. उदाहरण के अनुसार ‘त्व’ प्रत्यय लगाकर पाँच शब्द बनाइए

उदाहरण : देव + त्व =देवत्व

उत्तर:- माता + त्व = मातृत्व

नेता + त्व = नेतृत्व

उत्तरदायी + त्व‌‌ = उत्तरदायित्व

महा + त्व = महत्व

व्यक्ति + त्व = व्यक्तित्व

4. निम्नलिखित उदाहरण को पढ़कर पाठ में आए संयुक्त शब्दों को छाँटकर लिखिए

उदाहरणचलतेपुरज़े

उत्तर:- समझता-बुझता, पढ़े-लिखे, इने-गिने, मन-माना, लड़ाना-भिड़ाना, स्वार्थ-सिद्धि, थोड़े-से, दीन-दीन, दिन-भर, पूजा-पाठ, देश-भर, सुख-दुख।

5. ‘भी’ का प्रयोग करते हुए पाँच वाक्य बनाइए

उदाहरणआज मुझे बाजार होते हुए अस्पताल भी जाना है।

उत्तर:- (). अभी तो मेरा यह काम भी बाकी है।

(). वहां एक और ज्वालामुखी भी थी, पर वह शांत थी।

(). उस समय जातिवाद भी जोरों पर था।

(). रमा को वहां देख कर टॉम भी मुस्कुराया।

(ड़). किरण फोटोग्राफर के साथ-साथ एक अच्छी पेंटर भी है।

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