NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kritika Chapter – 1 माता का आँचल

By | February 15, 2021

NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kshitiz Chapter 1 माता का आँचल यहाँ सरल शब्दों में दिया जा रहा है|  NCERT Hindi book for class 10 Kritika Solutions के Chapter 1 माता का आँचल  को आसानी से समझ में आने के लिए हमने प्रश्नों के उत्तरों को इस प्रकार लिखा है की कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक बात कही जा सके| इस पेज में आपको NCERT solutions for class 10 hindi Kritika

दिया जा रहा है|

NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kritika Chapter 1 माता का आँचल

प्रश्नअभ्यास

1.प्रस्तुत पाठ के आधार पर यह कहा जा सकता है कि बच्चे का अपने पिता से अधिक जुड़ाव था, फिर भी विपदा के समय वह पिता के पास न जाकर मां की शरण लेता है। आपकी समझ से इसकी क्या वजह हो सकती है?

उत्तर:- ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मां दिनभर घर के कामों में उलझी रहती है और उसके पास बच्चों के साथ खेलने-कूदने, उनसे बातें करने व उनका मन बहलाने के लिए समय नहीं होता; जबकि पिता बच्चों के साथ एक अच्छे मित्र की तरह रहते हैं और समय-समय पर उनके लिए मिठाइयां लाकर उन्हें खुश कर देते हैं। कई बाहर बच्चों की भलाई के लिए मां को उन्हें डांटना व मारना भी पड़ता है, इसलिए बच्चे पिता के साथ रहना अधिक पसंद करते हैं। लेकिन विपदा के समय उन्हें सिर्फ मां की ममता, स्नेह, लाड-प्यार और दुलार की आवश्यकता होती है क्योंकि केवल मां ही उनकी भावनाओं को समझती है।

2. आपके विचार से भोलानाथ अपने साथियों को देखकर से सिसकना क्यों भूल जाता है?

उत्तर:- बच्चे बहुत भोले और मासूम होते हैं। उनका ध्यान भटकाना और मन बहलाना बहुत आसान होता है। छोटी-छोटी चीजों से रोते हुए बच्चों का मन बहलाया जा सकता है। इसी प्रकार भोलानाथ भी अपने साथियों को देखकर उनके साथ विभिन्न प्रकार के खेल खेलने के लिए उत्सुक हो उठता है और उनके साथ खेलने-कूदने की खुशी में अपना रोना और सिसकना भूल जाता है।

3. आपने देखा होगा कि भोलानाथ और उसके साथी जबतब खेलतेखाते समय किसी न किसी प्रकार की तुकबंदी करते हैं। आपको यदि अपने खेलों आदि से जुड़ी तुकबंदी याद हो तो लिखिए।

उत्तर:- बचपन में हम पकड़म-पकड़ाई खेलने से पहले एक-दूसरे का हाथ पकड़कर व गोला बनाकर घूमते हुए निम्नलिखित तुकबंदी गाया करते थे-

अक्कड़ बक्कड़ बम्बे बो,

अस्सी नब्बे पूरे सौ,

सौ में लगा धागा,

चोर निकल के भागा।

4. भोलानाथ और उसके साथियों के खेल और खेलने की सामग्री आपके खेल और खेलने की सामग्री से किस प्रकार भिन्न है?

उत्तर:- भोलानाथ और उसके साथी खेल के लिए आँगन व खेतों में पड़ी चीज़ों को ही अपने खेल का आधार बनाते हैं | उनके लिए मिट्टी के बर्तन, पत्थर, पेड़ों के फलें, गीली मिट्टी, घर के छोटे-मोटे सामान आदि वस्तुएँ होती थी जिनसे वह खेलकर खुश रहते थे | परंतु आज के बालक जो खेल खेलते हैं वे इनसे पूर्णतः भिन्न हैं | हमारे खेलने के लिए क्रिकेट का सामान, किचेन सेट, डॉक्टर सेट, तरह-तरह के वीडियो गेम, व कंप्यूटर गेम आदि बहुत सी चीज़ें हैं जो इनकी तुलना में एकदम अलग है | भोलानाथ जैसे बच्चों की खेलने की सामग्री आसानी से व सुलभता से बिना मूल्य खर्च किये ही प्राप्त हो जाती हैं जबकी आज के बच्चों की खेल सामग्री बाज़ार से खरीदना पड़ता है |

5. पाठ में आए ऐसे प्रसंगों का वर्णन कीजिए जो आपके दिल को छू गए हों?

उत्तर:- पाठ में आए निम्नलिखित प्रसंग हमारे दिल को छू गए-

  • जब बाबूजी रामायण का पाठ करते तब हम उनकी बगल में बैठे-बैठे आईने में अपना मुंह निहारा करते थे। जब वह हमारी ओर देखते तब हम कुछ लजाकर और मुस्कुराकर आइना नीचे रख देते थे। वह भी मुस्कुरा पड़ते थे।
  • कभी-कभी बाबू जी हमसे कुश्ती भी लड़ते। वह शिथिल होकर हमारे बल को बढ़ावा देते और हम उनको पछाड़ देते थे। यह उतान पड़ जाते और हम उनकी छाती पर चढ़ जाते थे। जब हम उनकी लंबी-लंबी मूछें उखाड़ने लगते तब वह हंसते-हंसते हमारे हाथों को मूंछों से छुड़ाकर उन्हें चूम लेते थे।
  • जब पंगत बैठ जाती थी तब बाबूजी भी धीरे-से आकर पांत के अंत में जीमने के लिए बैठ जाते थे। उनको बैठते देखते ही हम लोग हंसकर और घरौंदा बिगाड़कर भाग चलते थे। वह भी हंसते-हंसते लोट-पोट हो जाते और कहने लगते- फिर कब भोज होगा भोलानाथ?

6. इस उपन्यास अंश में तीस के दशक की ग्राम्य संस्कृति का चित्रण है। आज की ग्रामीण संस्कृति में आपको किस तरह के परिवर्तन दिखाई देते हैं?

उत्तर:- प्रस्तुत पाठ के अनुसार तीस के दशक में गांव के लोग अत्यंतविनम्र,सीधे-साधेव भोले-

भाले हुआकरतेथे।उनकीईश्वरमेंबहुतअधिकआस्थाथीऔरवेप्रतिदिनघंटोंतकईश्वरकीपूजा-अर्चनाकरतेथे।उससमयमेंलोगमिल-जुलकररहतेथे, आज की ग्रामीण संस्कृति में अनेक परिवर्तन हो चुके हैं। आज कुओं से सिंचाई होने की प्रथा प्रायः समाप्त हो गई है। उसकी जगह ट्यूबवैल आ गए हैं। अब बैलों की जगह ट्रैक्टर आ गए हैं। आजकल पहले की तरह बूढे दूल्हे भी नहीं दिखाई देते। आज धीरे-धीरे ग्रामीण अंचल मौज-मस्ती और आनंद मनाने की चाल को भूलता जा रहा है। वहाँ भी भविष्य, प्रगति और पढ़ाई-लिखाई का भूत सिर पर चढ़कर बोलने लगा है।

7. पाठ पढ़तेपढ़ते आपको भी अपने मातापिता का लाड़प्यार याद आ रहा होगा। अपनी इन भावनाओं को डायरी में अंकित कीजिए।

उत्तर:- छात्र अपने माता-पिता के लाड-प्यार की स्मृतियों का वर्णन स्वयं करे।

8. यहां मातापिता का बच्चे के प्रति जो वात्सल्य व्यक्त हुआ है उसे अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर:- प्रस्तुत पाठ में भोलानाथ के माता-पिता का उसके प्रति असीम प्यार दिखाया गया है। भोलानाथ के पिता का उससे गहरा लगाव था। वे रोज सुबह उसे अपने साथ उठाते और दिनभर उसे अपने साथ-साथ रखते थे, उसे अपने कंधे पर बैठाकर झूलाते थे, उसके साथ कुश्ती लड़ते थे, उसे गले लगाकर चुंबन करते थे, उसके मजेदार खेलों में चुपके से शामिल हो जाते थे और उसका लाड़-दुलार करते थे। वहीं भोलानाथ की माता का स्नेह भी उसके प्रति असीम था। वे उसे विभिन्न चिड़ियों के नाम लेते हुए अपने हाथों से खाना खिलाती थी और उसकी हर जरूरत का ध्यान रखती थी। भोलानाथ का सांप के डर से अपनी मां की गोद में आकर छुप जाना, उसकी स्थिति देखकर मां का व्याकुल हो उठना और कांपते हुए रो पड़ना उनके स्नेहा और ममता को दर्शाता है।

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9. माता का आंचल शीर्षक की उपयुक्तता बताते हुए कोई अन्य शीर्षक सुझाइए।

उत्तर:- प्रस्तुत पाठ का शीर्षक ‘माता का आंचल’ उपयुक्त है, क्योंकि इसमें लेखक ने

10. बच्चे मातापिता के प्रति अपने प्रेम को कैसे अभिव्यक्त करते हैं?

उत्तर:- बच्चे माता-पिता के प्रति अपने प्रेम को विभिन्न प्रकार से व्यक्त करते हैं-

  • माता-पिता के गले लगकर व उनका चुंबन करके
  • उनकी गोद में बैठकरलोरियां सुनकर
  • उनसेअपनी मनपसंद की चीजों के लिए ज़िद करके
  • उनसे ढेर सारे सवाल पूछकर
  • उनकी पीठ पर सवार होकर
  • उन्हें अपनी आधी-अधूरी बातें सुनाकर
  • उनके हाथों से खाना खाने की ज़िद करके
  • दिनभर उनके साथ-साथ घूमकर

11. इस पाठ में बच्चों की जो दुनिया रची गई है वह आपके बचपन की दुनिया से किस प्रकार भिन्न है?

उत्तर:- प्रस्तुत पाठ में बच्चों की जो दुनिया रची गई है उसमें गांव के साधारण बच्चों का जीवन दिखाया है, जिनके पास खेलने के लिए अलग से खरीदी हुई कोई सामग्री नहीं होती थी। वे गीली मिट्टी, रेत, चबूतरे, कागज, पेड़-पौधों, पत्तों, टूटे घड़ों के टुकड़ों, आदि से खेलते थे। ‘माता का अँचल’ नामक पाठ में बच्चों की जिस दुनिया की संरचना की गई है उसकी पृष्ठभूमि पूर्णतया ग्रामीण जीवन पर आधारित है। पाठ में तीस-चालीस के दशक के आस-पास का वर्णन है। इस ग्रामीण परिवेश में खेतों में उगी फ़सलें, फ़सलों के बीच उड़ती-फिरती चिड़ियाँ, उनका बालकों द्वारा उड़ाया जाना, बिल में पानी डालना और चूहे की जगह साँप निकलने पर डरकर भागना, आम के बाग में बच्चों का पहुँचना और वहाँ भीगना, बिच्छुओं को देखकर भागना, मूसन तिवारी को चिढ़ाना, माता दुवारा पकड़कर बलपूर्वक तेल लगाना, टीका लगाना आदि का अत्यंत स्वाभाविक चित्रण है।यह सब हमारे बचपन से पूर्णतया भिन्न है। आज तीन वर्ष या उससे कम उम्र में ही बालकों को पूर्व प्राथमिक विद्यालयों में भरती करा दिया जाता है। इससे उनका बचपन प्रभावित होता है। खेलों में क्रिकेट, फुटबॉल, कंप्यूटर, वीडियोगेम, मोबाइल फ़ोन पर गेम, लूडो, कैरम आदि खेलते हैं। माता-पिता के पास कहानियाँ सुनाने का समय न होने के कारण बच्चे टीवी पर कार्यक्रम देखकर अपनी शाम बिताते हैं।

12. फणीश्वरनाथ रेणु और नागार्जुन की आंचलिक रचनाओं को पढ़िए।

उत्तर:– छात्र स्वयं फणीश्वरनाथ रेणु और नागार्जुन की आंचलिक रचनाओं को पढ़े।

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